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केंद्र सरकार द्वारा खनिज संपदा से जुड़े कानून में किए जा रहे संशोधन के खिलाफ झारखंड में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने माइंस एंड मिनरल अमेंडमेंट बिल 2026 को झारखंड के खनिज अधिकारों, राजस्व और आर्थिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए इसके विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। आंदोलन की रणनीति को लेकर रविवार को राज्य के सभी जिलों में जिला स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। इसी कड़ी में सरायकेला-खरसावां जिले में भी झामुमो ने विशेष आपात बैठक कर आगे की रणनीति पर मंथन किया। रविवार की शाम परिसदन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता झामुमो जिला अध्यक्ष शिवेंदू महतो ने की। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम सांसद जोबा मांझी उपस्थित रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में खरसावां विधायक दशरथ गागराई एवं ईचागढ़ विधायक सविता महतो मौजूद रहीं। बैठक में केंद्रीय सदस्य गणेश महाली, कृष्णा बास्के एवं गणेश चौधरी, सांसद प्रतिनिधि प्रोफेसर केपी सोरेन, युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष भूगलू सोरेन सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित खनिज कानून के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में खनिज अधिकारों से जुड़े किसी भी बदलाव का सीधा असर राज्य के आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। झामुमो नेताओं ने कहा कि पार्टी राज्य के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। बैठक में भोला महंती, अविनाश कवि, कृष्णा राणा, भोमरा मांझी, शंभू आचार्य व विशु हेंब्रम समेत अन्य कार्यकर्ताओं की भी उपस्थिति रही। इस दौरान जिला स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को आंदोलन के लिए तैयार करने और मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई।
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