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20 साल बाद बहाली का रास्ता साफ:राज्य में किसी भी विषय का...




48 में से 33 पद खाली, अब गणित, विज्ञान व अर्थशास्त्र की अनिवार्यता खत्म झारखंड सरकार ने राज्य योजना सेवा में अधिकारियों की नियुक्ति के नियम बदल दिए हैं। अब किसी भी विषय से स्नातक अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए राज्य योजना सेवा में अधिकारी बन सकेंगे। इसके लिए गणित, अर्थशास्त्र और विज्ञान से स्नातक होने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। सरकार ने नई नियमावली की अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य गठन के बाद 2006 तक राज्य योजना सेवा में पुरानी व्यवस्था के तहत नियुक्तियां हुई थीं। इसके बाद करीब 20 वर्षों से इस सेवा में बहाली नहीं हुई। अब सरकार ने चयन प्रक्रिया में बदलाव करते हुए बिहार की तर्ज पर संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के पैनल से नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इससे लंबे समय से खाली पड़े पदों पर बहाली का रास्ता साफ हो गया है। वर्तमान में राज्य योजना सेवा के 48 स्वीकृत पदों में 33 पद खाली हैं। सरकार का मानना है कि सीमित पात्रता के कारण नियुक्तियां प्रभावित हो रही थीं। इसी वजह से पात्रता की शर्तों और चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। नियुक्ति के नियमों में इसलिए किया गया बदलाव
पुरानी नियमावली बेहद जटिल थी। सिर्फ गणित, अर्थशास्त्र और विज्ञान के छात्रों तक पात्रता सीमित होने के कारण झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) को उपयुक्त अभ्यर्थी नहीं मिल पा रहे थे। दो दशक से बहाली न होने के कारण विभाग में अधिकारियों का भारी टोटा हो गया है। सिर्फ 15 अधिकारियों के भरोसे पूरा काम चल रहा है। इससे राज्य की विकास योजनाओं की प्लानिंग और मॉनिटरिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। पहले इस सेवा के लिए अलग से प्रक्रिया या विशेष शर्त देखनी पड़ती थी। नियम बदलने से आयोग को अब अलग से कोई विशेष परीक्षा नहीं करानी होगी। अब सिविल सेवा परीक्षा के टॉप मेरिट लिस्ट से सीधे इन खाली पदों को भरा जा सकेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी। नियम बदलने के पीछे एक कारण यह भी है कि योग्यता का दायरा बढ़े और जेपीएससी की तैयारी करने वाले हर ग्रेजुएट को मौका मिले। संयुक्त बिहार के समय अलग से होती थी इनके लिए परीक्षा
संयुक्त बिहार के समय राज्य योजना सेवा के लिए अलग परीक्षा होती थी। इसमें बेसिक ग्रेड के सहायक योजना पदाधिकारी नियुक्त किए जाते थे। अवर योजना पदाधिकारी के पद से भी प्रोन्नति देकर सहायक योजना पदाधिकारी बनाया जाता था और कुल पदों का 25 प्रतिशत हिस्सा उनके लिए आरक्षित रहता था। झारखंड बनने के बाद भी कुछ समय तक यही व्यवस्था लागू रही। जानिए… राज्य योजना सेवा के अधिकारी का क्या है काम
राज्य योजना सेवा के अधिकारी राज्य और जिलों की विकास योजनाएं तैयार करते हैं। वे योजनाओं का बजट, वित्तीय प्रावधान और संसाधनों का आकलन करते हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति की निगरानी के साथ उनके परिणामों का मूल्यांकन कर सुधार के सुझाव भी देते हैं। विभिन्न विभागों के बीच विकास परियोजनाओं का समन्वय करने के अलावा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी नजर रखते हैं।



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