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27 मई को पद्मिनी, 11 जून को परम व 25 जून...




सिटी िरपोर्टर | बोकारो सनातन धर्म में एकादशी का बढ़ा महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भक्त भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एकादशी का व्रत रखते हैं। हिन्दु कैलेंडर में हर 11वीं तिथि को एकादशी का व्रत आता है। प्रत्येक माह दो एकादशी व्रत पड़ता है। इसमें एक कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष के समय रखा जाता है। अभी ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष चल रहा है। कृष्ण पक्ष की एकादशी 13 मई को रहेगी। यह अपरा एकादशी होगी। खास बात यह है कि इस बार ज्येष्ठ मास में चार एकादशी का व्रत होगा। 27 मई को पद्मिनी एकादशी, 11 जून को परम एकादशी और 25 जून को निर्जला एकादशी व्रत तीनों ही ज्येष्ठ मास पड़ेगा। पंडित डी के झा के अनुसार 12 मई को दोपहर 2:52 बजे एकादशी की तिथि का प्रवेश होगा और मई 13 को दोपहर 1:29 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 13 मई को एकादशी का व्रत रखा जा सकेगा। इस दिन उत्तरा भाद्र पद नक्षत्र और विष्कुंभ योग व प्रीति योग का संयोग बन रहा है। 13 मई को सुबह 9:04 बजे तक विष्कुंभी योग रहेगा। इसके बाद पूरे दिन प्रीति योग का संयोग बन रहा है। अधिक मास में ही निर्जला एकादशी साल की सभी 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण मनी गई है। उपवास के कठोर नियमों के कारण सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन माना गया। निर्जला एकादशी व्रत को करते समय लोग पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं। इस बार िनर्जला एकादशी का व्रत अधिक मास में रखा जाएगा। मलमास के कारण ज्येष्ठ मास 59 दिनों का, इसलिए 4 एकादशी व्रत इस बार ज्येष्ठ मास में मलमास लग है। इसके कारण 59 दिनों का ज्येष्ठ का महीना होगा। 2 मई से ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो चुकी है। अभी शुद्ध ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष चल रहा है। यह 16 मई तक रहेगा। 17 मई से मलमास यानि अधिक मास आरंभ होगा जो 15 जून तक रहेगा। इस दौरान 17 से 31 मई तक अधिक मास का ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष और 1 से 15 जून तक कृष्ण पक्ष रहेगा। इसके बाद 16 से 29 जून का समय शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष का होगा। दो शुद्ध ज्येष्ठ और दो अधिक मास के ज्येष्ठ मंे एकादशी का व्रत रहेगा।



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