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रांची यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी की अकादमिक काउंसिल की बैठक में ऐसे कई निर्णय लिए गए, जिनका असर आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय और इसके कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था पर दिखाई देगा। सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि कॉलेजों में संचालित पीजी की पढ़ाई को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएग। अब सिर्फ मोरहाबादी कैंपस स्थिति विभागों में पीजी की पढ़ाई होगी। इसके साथ ही डेटा साइंस, स्टैटिस्टिक्स समेत कई नए कोर्स शुरू करने, एनईपी-2020 के अनुसार डिग्री और बारकोड युक्त अंकपत्र बनाने और शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप ढालने पर सहमति बनी। बुधवार को मासकॉम सभागार में वीसी प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में अकादमिक काउंसिल की बैठक में 37 एजेंडों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। शुरू होने वाले नए कोर्स 10 से कम छात्र होने पर वोकेशनल कोर्स होंगे बंद अकादमिक काउंसिल ने यह भी तय किया कि किसी भी स्किल आधारित वोकेशनल कोर्स में यदि 10 से कम छात्र होंगे तो उसे बंद करने पर विचार किया जाएगा। साथ ही अब एक वर्ष से कम अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स संचालित नहीं किए जाएंगे। एमबीए के बाद पीएचडी की उपाधि पर ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी इन मैनेजमेंट’ लिखा जाएगा। यूजीसी पीएचडी रेगुलेशन- 2022 स्वीकृत एकेडमिक काउंसिल ने यूजीसी पीएचडी रेगुलेशन- 2022 से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। अब तक रांची विवि में 2009 के रेगुलेशन के आधार पर शोध कार्य हो रहे थे। नए नियम लागू होने से पीएचडी की प्रक्रिया राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। छात्रों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर जॉब मेला लगेगा। चार विभागों के नाम बदलेंगे, ‘स्कूल’ शब्द जुड़ेगा आरयू के चार विभागों के नाम बदले जाएंगे। इनमें मैनेजमेंट स्टडीज, योग, परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स और लीगल स्टडीज विभागों के नाम में ‘स्कूल’ शब्द जोड़ा जाएगा। एकेडमिक काउंसिल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। ये सभी प्रोफेशनल्स विभाग हैं, जो सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित की जा रही है। एनईपी के अनुसार होंगे डिग्री व अंक पत्र विश्वविद्यालय ने नई डिग्री और प्रमाणपत्र एनईपी-2020 के अनुसार होगा। इससे संबंधित प्रारुप को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इसमें यूजीसी के नियमों के अनुसार डिग्री में विषय और संकाय का नाम का उल्लेख रहेगा। सबसे पहले इस ओर लॉ डीन डॉ पंकज चतुर्वेदी ने विवि का ध्यान आकृष्ट कराया था। ताकि छात्रों को जॉब में कठिनाई न हो। प्रवासी भारतीयों को जोड़ेगा ‘डायस्पोरा स्टडीज सेंटर’ आईक्यूएसी की पहल पर विवि में ‘डायस्पोरा स्टडीज सेंटर’ स्थापित करने पर सहमति दी गई। वीसी प्रो. सरोज शर्मा ने कहा कि विदेशों में बड़ी संख्या में ऐसे प्रवासी भारतीय हैं, जिनकी जड़ें झारखंड और बिहार से जुड़ी हैं। वे अपनी भाषा और संस्कृति से दोबारा जुड़ना चाहते हैं। इसमें स्थानीय लैंग्वेज की ऑनलाइन मोड में ट्रेनिंग दी जाएगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई पर फोकस सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस) स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की दिशा में कार्य करेगा। साथ ही एआई और ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म ‘मूक’ (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) को अकादमिक ढांचे का हिस्सा बनाने पर बल दिया गया। इसलिए कॉलेजों में खत्म हुई पीजी की पढ़ाई… बैठक में सबसे अहम फैसला कॉलेजों में संचालित पीजी कोर्स को समाप्त करना है। सरकार द्वारा पहले ही कॉलेजों में पीजी की एडमिशन सीटों का आवंटन नहीं करते हुए बंद करने की दिशा में पहल शुरू कर दी गई थी। सरकार का मानना है कि स्नातकोत्तर शिक्षा को विवि परिसर में केंद्रीकृत करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और शोध गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। इस निर्णय के क्रियान्वयन की रूपरेखा आगे तय की जाएगी।
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