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45 दिनों में 56 लोगों को सांप ने डसा, अलर्ट जारी, एक्सपर्ट...


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Deoghar Snake Bite Cases: मानसून शुरू होते ही देवघर में जहरीले सांपों का खतरा बढ़ गया है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले 45 दिनों में सांप काटने के 56 मामले सामने आए हैं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो चुकी है. विशेषज्ञों ने लोगों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने, झाड़ियों को हटाने, दरारों को बंद करने और बारिश के मौसम में सतर्क रहने की अपील की है, ताकि सांपों के घर में प्रवेश और हादसों से बचा जा सके.

देवघर: मानसून की बारिश शुरू होते ही जिले में जहरीले सांपों का खतरा तेजी से बढ़ गया है. लगातार बारिश के कारण खेतों, खलिहानों और जंगलों में बने सांपों के बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप अपने बिल छोड़कर सूखी और सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकल आते हैं. यही वजह है कि इन दिनों गांवों के साथ-साथ शहरों के घनी आबादी वाले इलाकों में भी सांप दिखाई दे रहे हैं. कई बार सांप घरों, गोहालों, लकड़ी या भूसे के ढेर और झाड़ियों में छिप जाते हैं. ऐसे में अनजाने में लोगों का सामना उनसे हो जाता है. थोड़ी सी लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है. देवघर जिले में भी मानसून के साथ सांप काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे लोगों में दहशत का माहौल है.

45 दिनों में सामने आए 56 मामले
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 45 दिनों में देवघर जिले में जहरीले सांप के काटने के 56 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है. लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है. जिले के अलग-अलग इलाकों में कई प्रजाति के सांप पाए जा रहे हैं. इनमें स्पेक्टेकल कोबरा, करैत और बैंडेड करैत जैसे अत्यधिक विषैले सांप शामिल हैं. इसके अलावा धामन, बड़ुवा और सैंड बोआ जैसे गैर-विषैले सांप भी बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन सही पहचान नहीं होने के कारण लोग घबरा जाते हैं और कई बार गलत कदम उठा लेते हैं.

घरेलू उपायों से भी किया जा सकता है बचाव
देवघर प्रखंड के बगोहरी गांव निवासी 82 वर्षीय तारकेश्वर मिश्रा बताते हैं कि बारिश के मौसम में सबसे जरूरी बात घर और उसके आसपास साफ-सफाई बनाए रखना है. यदि घर के आसपास झाड़ियां, घास या बेकार सामान जमा हो, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए. घर की दीवार, फर्श या आंगन में यदि कहीं बिल, दरार या छेद दिखाई दे, तो उसे मिट्टी, सीमेंट या अन्य सुरक्षित सामग्री से बंद कर देना चाहिए. इससे सांपों के घर में प्रवेश की संभावना कम हो जाती है. उन्होंने बताया कि पहले के समय में लोग मानसून के दौरान हर शाम महुआ के फल, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कौड़ी’ कहा जाता है, उसकी खल्ली जलाते थे. ऐसी मान्यता है कि उसके धुएं की गंध से सांप घर के आसपास नहीं आते थे. आज भी कई ग्रामीण परिवार इस पारंपरिक तरीके का उपयोग करते हैं.

रसायनों के इस्तेमाल में बरतें सावधानी
तारकेश्वर मिश्रा ने बताया कि पहले गांवों में घर के चारों ओर गमेक्सीन पाउडर का छिड़काव भी किया जाता था. लोगों का मानना था कि इससे सांप, बिच्छू, चींटी और अन्य रेंगने वाले जीव घर से दूर रहते हैं. हालांकि आधुनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी जानकारी के अनुसार गमेक्सीन जैसे रसायनों के उपयोग पर कई जगह प्रतिबंध या सीमाएं लागू हैं. इसलिए किसी भी रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि या स्वास्थ्य विभाग से सलाह लेना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि सांपों से बचाव के लिए घर और आसपास की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, रात में टॉर्च का उपयोग, खुले में नंगे पैर नहीं चलना और बच्चों को सतर्क रहने की जानकारी देना सबसे प्रभावी उपाय हैं. मानसून के मौसम में थोड़ी सी सावधानी बड़े हादसों से बचा सकती है और पूरे परिवार को सुरक्षित रख सकती है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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