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Indian Economy : एनआरआई चाहें तो घटा सकते हैं देश की महंगाई,...


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NRI in Indian Economy : आरबीआई और सरकार ने पिछले दिनों विदेशी मुद्रा को भारत लाने के लिए नियमों में बदलाव किया था. अब भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान की सिंगापुर ब्रांच के एक्सपर्ट ने इस कानून की सराहना करते हुए कहा है कि एनआरआई चाहें तो इस बदलाव के जरिये देश में 80 अरब डॉलर की फॉरेन करेंसी आ सकती है. इससे आयात बोझ घटाने और महंगाई कम करने में मदद मिलेगी.

एनआरआई चाहें तो घटा सकते हैं देश की महंगाई, एक्सपर्ट ने बताया जुगाड़ Zoom

रिवर्ज बैंक ने एनआरआई को पैसे जमा करने पर ज्यादा ब्याज का ऑफर दिया है.

नई दिल्ली. देश के खजाने पर बढ़ते आयात बिल और आम आदमी पर बढ़ती महंगाई को घटाने में अनिवासी भारतीय यानी एनआरआई बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट इंस्टीट्यूट (आईसीएआई) की सिंगापुर ब्रांच में तैनात एक एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार की ओर से विदेशी मुद्रा को लेकर बदले गए नियमों के बाद अगर एनआरआई की ओर से प्रयास किया जाए तो देश में 70 से 80 अरब डॉलर यानी करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा आ सकती है. इससे आयात बिल को कम करने और देश के भीतर महंगाई घटाने में भी मदद मिलेगी.

आईसीएआई से जुड़े सिंगापुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने बताया कि सरकार और आरबीआई की ओर से एफसीएनआर पहल के तहत किए गए बदलाव के बाद एनआरआई भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं. इसके तहत बैंक सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं. विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) योजना के तहत एनआरआई और भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) भारतीय बैंकों में प्रमुख विदेशी मुद्राओं में अपनी कमाई को सुरक्षित रूप से जमा कर उस पर मोटा ब्याज प्राप्त कर सकते हैं. यह खाता एफडी की तरह काम करता है और इसमें जमा राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित होने के बजाय विदेशी मुद्रा में ही रहती है.

आरबीआई ने क्यों बदले थे नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने और रुपये को समर्थन देने की रणनीति के तहत सीमित अवधि के लिए बैंकों को एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति दी है. आईसीएआई की सिंगापुर शाखा के चेयरमैन संजय गट्टानी ने बताया कि 30 सितंबर, 2026 तक खुली इस एफसीएनआर सुविधा के तहत अब तक 10 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं.

एनआरआई की भूमिका बढ़ी
गट्टानी ने कहा कि इस पहल के बाद एनआरआई की भूमिका बढ़ गई है और वे भारत में 70-80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं. इस तरह की फॉरेन करेंसी आने से भारत की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी और देश के विकास में सीधे योगदान देने का अवसर भी मिलेगा. आईसीएआई ने कार्यक्रम के जिरये दुनियाभर के 1,800 से ज्यादा लोगों को भारत के इस नए कदम के बारे में बताया और उसका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
आरबीआई की ओर विदेशी मुद्रा को भारत में लाने के लिए बदले गए इस नियम के बाद बैंकिंग सिस्टम के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी को भी इसका लाभ मिलेगा. देश में फॉरेन करेंसी आने से आयात पर दबाव कम होगा और चालू खाते के घाटे को मैनेज करने में आसानी होगी. इससे आयात सस्ता होगा और देश के भीतर बाहर से आने वाले सामानों की कीमतों पर भी काबू पाने में सफलता मिलेगा, जो महंगाई कम करने में मददगार साबित होगा.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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