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5 महीने बाद फिर अनाथ बच्चों के घर पहुंचे बोकारो DC, पढ़ाई...


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Bokaro News: माता-पिता का साया उठने के बाद तीन बच्चों की जिंदगी में मुश्किलें बढ़ गईं, लेकिन उनकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर प्रशासन ने हाथ नहीं खींचे. बोकारो के DC अजय नाथ झा करीब पांच महीने बाद फिर बच्चों के घर पहुंचे. उन्होंने बच्चों का हाल जाना और पढ़ाई, देखभाल औ र आर्थिक मदद को लेकर अफसरों को जरूरी निर्देश दिए.

5 महीने बाद फिर अनाथ बच्चों के घर पहुंचे बोकारो DC, परवरिश का रख रहे खास ख्यालZoom

बोकारो डीसी अजय नाथ झा अनाथ बच्चों से मिलने पहुंचे.

बोकारोः झारखंड के बोकारो में एक अफसर ने मानवता की मिसाल पेश की. उपायुक्त अजय नाथ झा की संवेदनशील पहल एक बार फिर चर्चा में है. माता-पिता को खो चुके तीन बच्चों का हाल जानने के लिए उपायुक्त करीब पांच माह बाद फिर उनके घर पहुंचे. बच्चों से मुलाकात कर उनकी पढ़ाई और देखभाल की जानकारी ली. साथ ही, बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अफसरों को निर्देश दिए. सड़क दुर्घटना में माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों की शिक्षा और लालन-पालन की दिशा में प्रशासन लगातार कोशिश कर रहा है.

एक्सीडेंट में हो गई थी मां-पिता की मौत
दरसअल, 14 मई 2026 को चंदनकियारी प्रखंड के बरमसिया ओपी क्षेत्र के दुबेकांटा के पास सड़क दुर्घटना में सपन मांझी और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी की मौत हो गई थी. हादसे में उनके तीन बच्चे विमल, विद्युत और पल्लवी माता-पिता के प्यार से से वंचित हो गए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर बच्चों की कठिन परिस्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन उनकी शिक्षा, देखभाल और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रहा है.

डीसी ने बच्चों का हाल जाना
उपायुक्त अजय नाथ झा बच्चों के घर पहुंचे और उनका हाल जाना. पढ़ाई और देखभाल की जानकारी ली. उन्होंने बीडीओ अजय वर्मा और सीओ रवि आनंद से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी लेते हुए आगे की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उपायुक्त ने बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने देने का निर्देश दिया. विमल और विद्युत का आगामी 2 से 3 नवंबर तक सेक्टर-2 स्थित नेताजी आवासीय विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने को कहा.

हर महीने शासन से मिलती है 4-4 हजार की मदद 
पल्लवी की दसवीं तक की पढ़ाई निर्बाध जारी रखने और उसके बाद परिस्थिति के अनुसार आवासीय विद्यालय में नामांकन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया. बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए दो बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना के तहत प्रतिमाह चार-चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी. इसके अलावा, माता-पिता के बैंक खातों में जमा राशि को तीनों बच्चों के नाम पर एफडी कराने की दिशा में भी पहल की जा रही है. उपायुक्त के स्वयं बच्चों के घर पहुंचकर उनका कुशल-क्षेम पूछने और भविष्य से जुड़े मामलों की जानकारी लेने की पहल गांव में चर्चा का विषय बनी रही.

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Mahesh Amrawanshi

Journalist with a sharp focus on Bihar and Jharkhand, covering politics, crime, and trending stories with a strong ground-level perspective. Passionate about listening to stories, understanding them deeply, and…

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