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देवघर जिले के गोपीडीह गांव के किसान विष्णु कापड़ी ने मिर्च की खेती से सफलता की नई मिसाल पेश की है. पहले वे झींगा, कद्दू और भिंडी जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. लेकिन कम मुनाफे के कारण उन्होंने मिर्च की खेती शुरू की. आज वे एक एकड़ जमीन में मिर्च उगाकर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी सफलता से आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और नकदी फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
देवघर: झारखंड के देवघर जिले के गोपीडीह गांव के किसान दुखन कापड़ी की सफलता की कहानी आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है. एक समय था जब वे अपनी जमीन पर झींगा, कद्दू और भिंडी जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. इन फसलों से उन्हें सामान्य आमदनी तो हो जाती थी, लेकिन मेहनत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल पाता था. बढ़ती लागत और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें अक्सर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया और अपनी खेती में बदलाव लाने की ठानी. इसी सोच के साथ उन्होंने एक एकड़ जमीन में मिर्च की खेती शुरू की. शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें इस खेती के जोखिम के बारे में बताया, लेकिन दुखन कापड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और पूरे आत्मविश्वास के साथ मिर्च की खेती में जुट गए.
बहुत कम लागत में शुरू की मिर्च की खेती
मिर्च की खेती शुरू करने के लिए उन्होंने बेहद कम लागत से काम शुरू किया. सही समय पर खेत की तैयारी, अच्छी किस्म के पौधों का चयन और नियमित देखभाल के कारण उनकी फसल ने बेहतर परिणाम देना शुरू कर दिया. पौधों की अच्छी वृद्धि हुई और खेत में मिर्च की भरपूर पैदावार हुई. जब फसल तैयार हुई और बाजार में इसकी बिक्री शुरू हुई, तब उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक लाभ मिला. जिस खेती की शुरुआत उन्होंने बेहद कम निवेश से की थी, उसी खेती ने उन्हें लगभग दो लाख रुपये की आमदनी दिला दी. अच्छी गुणवत्ता की मिर्च होने के कारण व्यापारियों ने भी उनकी उपज को अच्छे दामों पर खरीदा. इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और खेती के प्रति उनका विश्वास और बढ़ गया.
क्या कहते हैं किसान?
दुखन कापड़ी बताते हैं कि वे पिछले 40 वर्षों से खेती कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कई तरह की फसलों की खेती की, लेकिन सबसे अधिक फायदा उन्हें मिर्च की खेती से हुआ. उनका कहना है कि यदि किसान सही तकनीक अपनाएं तो मिर्च की खेती बेहद लाभदायक साबित हो सकती है. वे कहते हैं कि खेती में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही योजना, तकनीकी जानकारी और बाजार की मांग को समझना भी जरूरी है. उन्होंने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की खेती करके किसान अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं. आज उनके खेत को देखने और मिर्च की खेती की जानकारी लेने के लिए आसपास के गांवों से किसान पहुंच रहे हैं.
किसान कमा सकते हैं बेहतर मुनाफा
दुखन कापड़ी की यह सफलता उन किसानों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो कम आय और बढ़ती लागत से परेशान हैं. उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और नए प्रयोगों ने यह साबित कर दिया है कि खेती में आधुनिक सोच और नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर कमाई की जा सकती है. आज वे न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहे हैं. उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि किसान सही फसल का चयन करें और पूरी लगन के साथ खेती करें, तो खेत ही उनकी किस्मत बदल सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें