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Ranchi Famous Personality: रांची की गाइनेकोलॉजिस्ट करुणा सहदेव बाबा हॉस्पिटल में 100 रुपये में इलाज और 6000 में प्रसव करती हैं. आज वह 65 की उम्र में 18 घंटे काम करती हैं. इसके साथ ही वह एक लाख से ज्यादा महिलाओं का प्रसव करा चुकी हैं.
रांची की जानी मानी गाइनेकोलॉजिस्ट करुणा सहदेव एक ऐसा नाम है कि शायद ही कोई महिला उन्हें न जानती हो. गरीबों के बीच तो इन्हें भगवान माना जाता है. इन्होंने खुद का अस्पताल भी खोला है, जिसका नाम बाबा हॉस्पिटल है. जहां पर मात्र ₹100 में ही वह गरीबों को देखती हैं. आज 65 साल की उम्र में भी वह 18 घंटे काम करती हैं और सरकारी अस्पताल में खास तौर पर गरीबों का इलाज करती हैं.
वह बताती हैं कि उन्होंने रांची के रिम्स से ही पढ़ाई की हैं और इस दौरान देखा कि काफी गरीब लोग हैं, जो भटकते हैं इलाज के अभाव में, खासतौर पर अच्छे इलाज के अभाव में. कई लोगों की तो जान भी चली जाती है. उन्होंने देखा कि खासतौर पर जो प्रेग्नेंट महिलाएं होती हैं, उनको बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. बड़े बेबस और लचर स्थिति में लोगों को देखा है.
करुणा सहदेव ने बताया कि उन्हें अच्छा खासा करोड़ों रुपये का ऑफर आ चुका है, लेकिन हमेशा से गरीबों की सेवा करनी थी. इसलिए आज भी सरकारी अस्पताल में बैठती हैं और खुद का अस्पताल बनाकर गरीबों की सेवा करती है. ऐसे में मेडिकल फील्ड में यह एक काफी पॉपुलर चेहरा है. कोई भी प्रेग्नेंट महिला हो गरीब से लेकर अमीर हमेशा इन्हीं को तलाशते हुई नजर आती है.
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उन्होंने बताया कि पढ़ाई के समय ही उन्होंने सोच लिया था जब डॉक्टर बन जाऊंगी तब इन सभी का मुफ्त में या फिर एकदम सस्ते में इलाज करूंगी. आज उनके अस्पताल में मात्र ₹100 में इलाज होता है और 6000 में प्रसव हो जाता है. जब भी यहां पर आएंगे तो आपको कम से कम 100 से अधिक मरीज बाहर वेट करते हुए दिखाई देंगे. इसके अलावा उन्हें कई सारे अवार्ड जैसे बेस्ट डॉक्टर , बेस्ट गाइनेकोलॉजिस्ट जैसे अवार्ड से नावाजा जा चुका है. उन्होंने अब तक एक लाख से अधिक प्रसव ऑपरेशन किया है. उन्हें रांची में ‘ मां रूपी’ डॉक्टर का दर्जा मिला है.
करुणा बताती हैं कि डॉक्टर बनना यह सिर्फ एक पेशा नहीं है. एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. समाज के प्रति, लोगों के प्रति, इसे आप पैसे कमाने का पेशा नहीं बना सकते हैं. जब कोई यहां पर गरीब आता है. हम उसका इलाज करते हैं और वह खुश होकर जाता है, पूरी तरह ठीक होकर तो उसमें जो आनंद आता है. वह करोड रुपए में भी नहीं है.