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झारखंड की रिया तीर्की देश की पहली आदिवासी ब्यूटी क्वीन बनी हैं. उन्होंने दो बार मिस झारखंड का खिताब जीता है. इस मुकाम के लिए उन्होंने काफी ताने झेले. रिया ने सात साल तक चावल नहीं खाया. वह फेमिना मिस इंडिया की फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं. अब वह लड़कियों को मॉडलिंग सिखा रही हैं.
रिया बताती हैं कि आदिवासी समुदाय से आने के कारण उन्हें करियर के शुरुआती दिनों में समाज और बाहर के लोगों से काफी ताने सुनने को मिले. लोग अक्सर उनका मजाक उड़ाते हुए कहते थे, “चली है ऐश्वर्या राय बनने.” इन कड़वी बातों ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला दिया. ब्यूटी क्वीन बनने की ठान चुकी रिया ने आठ साल तक लगातार कड़ी मेहनत की और अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया. इस मुकाम को हासिल करने के लिए उन्होंने सात साल तक चावल तक नहीं खाया.
रांची के विवेकानंद विद्या मंदिर और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाली रिया बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं. मॉडलिंग के अलावा उन्हें बैडमिंटन, बैंकिंग और एथोलॉजी में भी गहरी रुचि है. भविष्य की योजनाओं को लेकर रिया बताती हैं कि उन्हें नागपुरी संस्कृति से बेहद लगाव है. वह आगे चलकर नागपुरी फिल्म इंडस्ट्री में काम करना चाहती हैं. उनके कुछ एल्बम रिलीज भी हो चुके हैं और वह झारखंड की खूबसूरत वादियों में बेहतरीन फिल्में बनाना चाहती हैं.
रिया ने आज के युवाओं को सफलता का एक बेहद व्यावहारिक मंत्र दिया है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले परिस्थितियों को लेकर ‘कंप्लेंट’ यानी शिकायत करना बंद कर दें, क्योंकि आपकी शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं है. जो भी मौका सामने आए, उसका पूरा फायदा उठाएं और जो साधन आपके पास मौजूद हैं, उसी में सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करें. रिया के अनुसार, सात साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह सफलता मिली है, इसलिए युवाओं को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपनी मेहनत के प्रति ईमानदार रहना चाहिए.
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