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भगवान शंकर के एक से बढ़कर एक भक्त हैं और इनकी महिमा की गाथाएं भी अपरंपार हैं. लोगों की भगवान शंकर में बड़ी आस्था है. भगवान शंकर को लोग मूर्ति और लिंग स्वरूप दोनों में पूजते हैं. देशभर में एक से बढ़कर एक शिवलिंग हैं और इनसे जुड़ी मान्यताएं और आस्थाएं हैं. आज हम आपको एक और रोचक शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पहुंचकर आप भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं.
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथधाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ मनोकामना लिंग हैं यानी सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा यहां पूरी होती है. यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग बाबाधाम आकर जलार्पण और पूजा करते हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबाधाम की यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक श्रद्धालु दुमका जिले में स्थित बासुकीनाथधाम जाकर भगवान शिव का दर्शन नहीं कर लेते.
बाबाधाम से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित बासुकीनाथधाम को बाबा बैद्यनाथ का दरबार पूरा करने वाला धाम माना जाता है. यहां के पुरोहितों के अनुसार, जो भक्त बाबाधाम में पूजा करने के बाद बासुकीनाथ में भी जलार्पण करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. इसी कारण सावन हो या सामान्य दिन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु दोनों धामों का दर्शन करने पहुंचते हैं. बासुकीनाथ मंदिर की अपनी अलग धार्मिक महत्ता है और यहां की कई परंपराएं लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं.
बासुकीनाथधाम परिसर में एक पवित्र शिवगंगा तालाब भी स्थित है. मंदिर में पूजा करने से पहले श्रद्धालु इस तालाब में स्नान कर खुद को पवित्र मानते हैं. इसी शिवगंगा की गहराई में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग श्रद्धा से पाताल बाबा के नाम से जानते हैं. यह शिवलिंग आम दिनों में पूरी तरह पानी के अंदर डूबा रहता है, इसलिए सालभर इसके दर्शन नहीं हो पाते. यही वजह है कि पाताल बाबा के दर्शन को बेहद दुर्लभ माना जाता है.
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हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले ज्येष्ठ माह में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान बासुकीनाथधाम के पुरोहित, स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन के सहयोग से शिवगंगा तालाब का पानी निकाला जाता है तथा उसकी साफ-सफाई की जाती है. जब तालाब का जलस्तर कम होता है, तब वर्षों से जलमग्न पाताल बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं को होते है. इस मौके का लोग पूरे साल इंतजार करते हैं. दूर-दूर से शिवभक्त केवल इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बासुकीनाथ पहुंचते हैं.
हाल ही में लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पाताल बाबा के दर्शन होने पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के पुजारियों ने षोडशोपचार विधि से भगवान शिव का विशेष पूजन कराया और भव्य श्रृंगार किया. सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालु शिवगंगा कुंड में उतरकर जलार्पण करते नजर आए. कई भक्तों ने कहा कि पता नहीं अगली बार ऐसा अवसर कब मिलेगा, इसलिए इस बार दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है. कुंड के आसपास भक्ति, श्रद्धा और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
पाताल बाबा को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच एक बेहद रोचक मान्यता भी प्रचलित है. स्थानीय तीर्थपुरोहित लम्बोदर मिश्रा बताते है कि यह स्वयंभू शिवलिंग लगभग 300 वर्ष पहले प्रकट हुआ था. हैरानी की बात यह है कि वर्षों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद बाबा पर चढ़ाए गए बिल्वपत्र, फूल, अबीर और अन्य पूजन सामग्री पूरी तरह सुरक्षित दिखाई देती है. जब शिवगंगा का पानी निकाला जाता है और पाताल बाबा के दर्शन होते हैं, तो ऐसा लगता है मानो अभी-अभी उनका श्रृंगार किया गया हो. श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य कृपा और चमत्कार मानते हैं. यही कारण है कि बासुकीनाथ का पाताल बाबा आज करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है.