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400 साल पुरानी शाही बावड़ी, जिसमें छिपा है इंजीनियरिंग का अनोखा चमत्कार;...


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Royal Stepwell of Golconda Fort: हैदराबाद के ऐतिहासिक गोलकोंडा किले में स्थित शाही बावड़ी आज भी अपनी अनूठी बनावट और रहस्यमयी इतिहास के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह किले की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी मानी जाती है, जो कुतुबशाही शासनकाल की उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली का बेहतरीन उदाहरण है. इतिहासकारों के अनुसार बावली के बीच कभी एक सुंदर फव्वारा हुआ करता था, जिसके आसपास शासक बैठकर प्राकृतिक वातावरण और पानी की फुहारों का आनंद लेते थे. यह बावड़ी केवल सौंदर्य का केंद्र नहीं थी, बल्कि पूरे किले तक पानी पहुंचाने का प्रमुख स्रोत भी थी.

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हैदराबाद. इतिहास के पन्नों को समेटे भाग्यनगर यानी हैदराबाद का ऐतिहासिक गोलकोंडा किला आज भी अपने भीतर कई ऐसे रहस्य और अचंभे छुपाए हुए हैं, जिन्हें देखकर लोग दंग रह जाते हैं. स्थापत्य कला और बेहतरीन इंजीनियरिंग के तालमेल का ऐसा ही एक उदाहरण इस किले के भीतर स्थित शाही बावड़ी है, जो पर्यटकों के लिए हमेशा से चर्चा का विषय रही है. यह बावड़ी न सिर्फ इस दुर्ग की सबसे बड़ी पानी की बावड़ी है बल्कि यह कुतुबशाही दौर के शाही वैभव और उनकी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली की जीती-जागती गवाही भी देती है.

इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, इस विशाल बावड़ी की गहराई बहुत ज्यादा है. प्राचीन काल में इस पूरी बावड़ी के ठीक बीचों-बीच एक बेहद खूबसूरत और कलात्मक फव्वारा हुआ करता था. किले के सुल्तान और राजा अक्सर इसके सामने बने ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर बैठकर ठंडी हवाओं के साथ इस फव्वारे के नयनाभिराम दृश्यों और पानी की फुहारों का आनंद लिया करते थे. मनोरंजन और खूबसूरती से अलग, इस बावड़ी का मुख्य काम बेहद रणनीतिक और जरूरी था.

सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं

पुराने समय में इस गहरी बावड़ी से ही प्राचीन स्वदेशी तकनीकों का उपयोग करके पूरे गोलकोंडा किले के भीतर पानी की निर्बाध सप्लाई की जाती थी. दुर्ग की अत्यधिक ऊंचाई पर होने के बावजूद इस अनूठी व्यवस्था से महल के कोने-कोने तक पानी पहुंचता था. वर्तमान में इस बावड़ी की बनावट को देखा जाए, तो इसके एक तरफ नीचे पानी तक उतरने के लिए बेहद सलीके से बनाई गई प्राचीन सीढ़ियां आज भी सुरक्षित हैं. चूंकि इसकी गहराई काफी ज्यादा है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह जगह संवेदनशील मानी जाती है.

पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है यह कदम

पुरातत्व विभाग ने इसी वजह से आम पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस गहरी बावड़ी के चारों तरफ एक मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण करा दिया है. इस दीवार के बनने से यहां आने वाले लोग और बच्चे बिना किसी खतरे के इस ऐतिहासिक और बेजोड़ धरोहर को करीब से निहार सकते हैं. गोलकोंडा किला घूमने आने वाले हर मुसाफिर के लिए यह बावड़ी अतीत के किसी सुनहरे सफर जैसी महसूस होती है.

About the Author

deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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