बोकारो: आज के समय में महिलाओं के लिए बुटीक व्यवसाय आत्मनिर्भर बनने का एक बेहतरीन माध्यम बनकर उभरा है. कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय न केवल रोजगार का अवसर प्रदान करता है, बल्कि अच्छी आय का स्रोत भी बन सकता है. बोकारो के सेक्टर-4 स्थित ‘द फैब्रिक जॉन’ बुटीक की संचालिका बसंती दास पिछले 35 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने बुटीक व्यवसाय शुरू करने से लेकर उसे सफल बनाने तक की कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं.
बसंती दास ने बताया कि बुटीक व्यवसाय को छोटे स्तर पर करीब 40 हजार रुपये की पूंजी से शुरू किया जा सकता है. इसमें दो सिलाई मशीनों पर लगभग 20 हजार रुपये, दुकान के इंटीरियर पर 5 हजार रुपये, दुकान या कार्यस्थल के किराये पर 5 हजार रुपये, स्टीम आयरन, कैंची और मेजरिंग टेप जैसे उपकरणों पर 5 हजार रुपये तथा टेलरिंग से जुड़े अन्य सामानों पर करीब 5 हजार रुपये खर्च किए जा सकते हैं.
उन्होंने बताया कि बुटीक में सिर्फ कपड़ों की सिलाई ही नहीं होती, बल्कि ग्राहकों की पसंद और जरूरत के अनुसार कस्टम डिजाइनिंग का काम भी किया जाता है. इसमें सूट, ब्लाउज, लहंगा, गाउन, कुर्ती, फॉल-पिको, अल्टरशन और ब्राइडल वियर जैसी सेवाओं की अच्छी मांग रहती है. खासकर शादी-विवाह के सीजन में ऑर्डर बढ़ने से कमाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है.
बसंती दास के अनुसार, साधारण डिजाइन वाले गाउन की सिलाई का शुल्क 1,500 रुपये से शुरू होकर 4,000 रुपये या उससे अधिक तक हो सकता है. वहीं, कस्टम ब्लाउज डिजाइनिंग के लिए डिजाइन और कार्य की जटिलता के आधार पर 150 रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक शुल्क लिया जाता है. ब्राइडल वियर और विशेष डिजाइन वाले परिधानों में मुनाफे की संभावना और भी अधिक रहती है.
उन्होंने कहा कि बुटीक व्यवसाय शुरू करने से पहले कम से कम 4 से 5 वर्षों का अनुभव होना बेहद जरूरी है. इच्छुक लोग किसी स्थापित बुटीक में काम करके डिजाइनिंग, कटिंग, सिलाई और व्यवसाय प्रबंधन की बारीकियां सीख सकते हैं. इससे व्यवसाय शुरू करने में आने वाली चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.
बसंती दास ने बताया कि आज के डिजिटल दौर में बुटीक व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करना भी जरूरी है. होम डिलीवरी, डिजाइन कैटलॉग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और डिजिटल प्रमोशन के जरिए ग्राहक संख्या बढ़ाई जा सकती है. इससे स्थानीय बाजार के अलावा दूसरे शहरों से भी ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
उन्होंने कहा कि यदि इस व्यवसाय को सही योजना और ग्राहकों की पसंद के अनुसार संचालित किया जाए, तो छोटे शहरों और कस्बों में भी हर महीने 50 हजार रुपये या उससे अधिक की आय आसानी से अर्जित की जा सकती है. इतना ही नहीं, यह व्यवसाय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरों को रोजगार देने का अवसर भी प्रदान करता है.