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झारखंड में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे 33 फार्मेसी कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट (सहमति पत्र) रद्द कर दिया गया है। इन कॉलेजों में अब आगामी सत्र 2026-27 में नए एडमिशन नहीं हो सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग की जांच में इन संस्थानों में आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर), प्रयोगशाला, आवश्यक उपकरण, योग्य शिक्षकों और शैक्षणिक मानकों से जुड़ी गंभीर कमियां मिलने के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई है। डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति के सदस्य सचिव द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित संस्थानों ने फार्मेसी एक्ट-1948 की धारा 10 व 12 और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक मानकों का पालन नहीं किया है। आगे क्या… शैक्षणिक गतिविधियां नहीं चला सकेंगे लेटर ऑफ कंसेंट रद्द होने के बाद संबंधित संस्थान डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति से जुड़े किसी भी प्रकार के नए नामांकन, पंजीयन (रजिस्ट्रेशन), परीक्षा अथवा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन नहीं कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश के बाद भी यदि कोई संस्थान नामांकन या अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित कॉलेज प्रबंधन की होगी। भास्कर इम्पैक्ट: लगातार उठाई थी आवाज फार्मेसी कॉलेजों में चल रही इस गड़बड़ी पर दैनिक भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। भास्कर ने उजागर किया था कि कैसे सिर्फ कागजों पर फैकल्टी, प्रयोगशाला और संसाधन दिखाकर धड़ल्ले से कॉलेज चलाए जा रहे थे। जांच में कुछ कॉलेज तो ऐसे मिले जो सिर्फ कागजों पर ही अस्तित्व में थे। इन खबरों का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाकर राज्यभर के फार्मेसी कॉलेजों की स्क्रूटनी कराई थी। जांच में कहीं आधारभूत संरचना का अभाव मिला, तो कहीं नियमानुसार फैकल्टी गायब थी। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर विभाग के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई है। इन कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट हुआ रद्द (गड़बड़ी मिलने पर विभाग के निर्देश पर हुई कार्रवाई)
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