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भास्कर न्यूज|लोहरदगा/पेशरार लोहरदगा जिले के अति दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, पेशरार प्रखंड की ओनेगढ़ा नदी पर बनने वाला पुल सात साल में भी पूरा नहीं हो सका। जिससे इस प्रखंड के तीन पंचायत रोरद, हेसाग और तेइमूपाठ की हजारों आबादी प्रभावित है। ये लोग बरसात में प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट जाते हैं। वर्ष 2019 में लगभग दो करोड़ रुपए की लागत से पांच स्पैन वाला पुल बनाने की स्वीकृति झारखंड स्टेट रूरल रोड अथॉरिटी डिपार्टमेंट से दी गई थी। इसकी देखरेख आरईओ विभाग कर रहा था। नदी के दोनों छोर पर पिलर खड़ा करने का काम किया जा रहा था। इसके कुछ ही दिन बाद लेवी को लेकर नक्सली घटना हुई। इसके बाद पुल निर्माण का काम पूरी तरह बंद हो गया। अधूरे निर्माण के निशान अभी भी मौजूद हैं। इस बीच वर्ष 2021 में एक बार फिर दो करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया। कार्य शुरू होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ी। इस बार भी संवेदक के किसी दूसरे मामले में जेल चले जाने के कारण कार्य बीच में रुक गया। इसके बाद अब तक कार्य अधूरा पड़ा है। इस नदी में 12 महीने पानी रहता है। पानी कम होने पर लोग उसमें से आते-जाते हैं। बरसात में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोरद के 11, हेसाग के 18 और तेइमूपाठ के 19 समेत तीनों पंचायत में करीब 50 गांव और 20 टोले हैं। इसकी आबादी करीब 40 हजार है। पुल नहीं होने से लोगों को आज भी आवागमन के लिए जूझना पड़ रहा है। कई बार की गई है निर्माण की मांग : िजप सदस्य पेशरार प्रखंड जिला परिषद सदस्य रूबी कुमारी बताती है कि इस बाबत जिला प्रशासन और विभाग को कई आवेदन दिए गए हैं। जिला परिषद की बैठक में जोरदार आवाज उठाई गई है, लेकिन इस ओर अबतक कोई पहल नहीं की गई है।नदी में पुल नहीं होने के कारण आवागमन की समुचित सुविधाओं से ग्रामीण वंचित है। अन्य दिनों में नदी का पानी कम रहने से पार कर ही आवागमन करते हैं। पुल निर्माण कार्य दो बार शुरू होने के बाद भी ठप पड़ गई। पेशरार थाना और प्रखंड मुख्यालय से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ओनेगड़ा नदी में पुल नहीं बनने के कारण इन गांव में विकास का पहिया थम सा गया है।
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