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न्याय की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद जब कुमकुम शिवा को अदालत से राहत मिली, तो उसे उम्मीद थी कि अब उसके जीवन की कठिनाइयां कुछ कम होंगी। अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद कुमकुम अपने ही ससुराल के दरवाजे पर पूरी रात पड़ी रही, लेकिन ससुराल वाले उसे उसे घर में घुसने नहीं दिए। दरअसल, रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम शशि भूषण शर्मा की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में पीड़िता कुमकुम शिवा के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पीड़िता के पति कुमार चिरंजीव झा, ससुर मुंद्रिका झा और सास रुना झा को घरेलू हिंसा में संलिप्त मानते हुए पीड़िता को एक लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने ससुराल वालों को निर्देश दिया है कि वे पीड़िता को उसकी ससुराल में रहने की अनुमति दें या फिर उसके स्तर के वैकल्पिक आवास या 4000 रुपए प्रति माह किराए के लिए दें। कोर्ट ने धुर्वा थाना प्रभारी और सीडीपीआे को इस आदेश का अनुपालन कराने का निर्देश दिया। इसके बाद शुक्रवार को सीडीपीओ और धुर्वा थाना की पुलिस ने पीड़िता कुमकुम को धुर्वा स्थित उसकी ससुराल तक पहुंचा दिया। पीड़िता ने बताया कि वह अदालत के आदेश की प्रति लेकर अपनी ससुराल पहुंची। जैसे ही ससुराल वालों ने उसे देखा, घर का दरवाजा बंद कर दिया गया। देर रात तक मैं ससुराल के आंगन में बैठी रही, लेकिन घर का दरवाजा नहीं खुला। ससुराल पक्ष ने आठ लाख रुपए दहेज मांगे, गर्भपात कराया: कुमकुम ने बताया कि उसकी शादी 18 अप्रैल 2018 को चिरंजीव झा के साथ हुई थी। विवाह के समय ससुराल पक्ष ने आठ लाख रुपए दहेज की मांग की थी, जबकि उसके पिता पांच लाख रुपए ही दे सके थे। इसके बाद से ही प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया।
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