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झारखंड में मानसून ने दस्तक दे दी है। एक ओर जहां इसने चिलचिलाती गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर लगातार हुई बारिश ने खेतों में लगी साग-सब्जियों को नुकसान पहुंचाया है। इसकी वजह से सब्जियों की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश के कारण सब्जियों के खेतों में भारी जलजमाव हो गया है। इस जलभराव से सब्जियों में कीड़े लगने की संभावना बढ़ गई है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं। 5 से 10 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी
मौसम में आए इस बदलाव का सीधा असर अब सब्जियों की कीमतों पर दिख रहा है। झारखंड के सब्जी बाजारों में कुछ दिन पहले तक सस्ते दामों पर बिकने वाली सब्जियों के भाव में अचानक 5 से 10 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। तीन-चार दिन पहले 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम बिकने वाला टमाटर अब 60 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। इसी तरह, 30 से 40 रुपए प्रति किलोग्राम में मिलने वाली गोभी की कीमत भी बढ़कर 60 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। जलजमाव के कारण तैयार सब्जियों में कीटाणु लग गए
बैंगन, भिंडी और करेला जैसी अन्य सब्जियों के भाव में भी 5 से 10 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई है। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, कीमतों में इस अचानक उछाल का मुख्य कारण हाल ही में हुई बारिश है। खेतों में जलजमाव के कारण तैयार सब्जियों में कीटाणु लग गए हैं, जिससे वे खराब हो रही हैं और बाजार में उनकी आवक कम हो गई है। सब्जियों की ताजा कीमत नोट: कीमत रुपए प्रति किलोग्राम की दर से।
इधर, सब्जियों के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेबों पर इसका खासा असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और रोजमर्रा के दिनों में उपयोग किए जाने वाली वस्तुओं के दामों में वॄद्धि के बाद अब साग-सब्जी के बढ़े दामों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण कई जगहों पर खेतों में जलजमाव हुआ
इधर, कृषि वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार रॉय के अनुसार कोडरमा में फिलहाल ज्यादा बारिश तो नहीं हुई है, लेकिन जितनी बारिश हुई है, अगर उसका पानी खेतों में जमा हुआ है तो वह खेतों में लगी सब्जियों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल किसान इस बारिश के लिए तैयार नहीं थे, ऐसे में बारिश होने के कारण जिन जगहों पर खेतों में जलजमाव हुआ है, वहां लगे फसलों में कीड़े लगने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इस बारिश में विशेषकर टमाटर, लौकी, मिर्च, बैगन जैसे फसलों के फूल झड़ जाने से उत्पादन में कमी आती है। बेल वाली फसल मचान बनाकर लगाने की सलाह
हालांकि उन्होंने कहा कि किसान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था कर इससे निजात पा सकते हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से पूर्व किसानों को सतर्क रहने की भी उन्होंने सलाह दी है। साथ ही उन्होंने बेल वाली फसल जैसे लौकी, खीरा इत्यादि को मंडप (मचान) बनाकर लगाने की सलाह दी है।
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