Neha Bora Ink Attack, JPSC Exam Scam: रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर प्रदर्शन के दौरान किसी ने स्याही फेंक दी. इस घटना के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं हालांकि यह पहली बार नहीं है जब उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया हो. पिछले कुछ वर्षों में छात्र आंदोलनों, शिक्षा से जुड़े मुद्दों और लंबे अनशन के कारण वह लगातार चर्चा में रही हैं.आइए जानते हैं कि आखिर नेहा बोरा कौन हैं,उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है, उनका छात्र राजनीति का सफर कैसा रहा और किन मुद्दों पर वह लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं?
कई शहरों में हुई नेहा बोरा की पढ़ाई
नेहा बोरा मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं हालांकि उनका बचपन केवल एक ही शहर में नहीं बीता. शुरुआती वर्षों में वह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी रहीं. अलग-अलग राज्यों में रहने की वजह से उन्हें अलग-अलग सामाजिक और शैक्षणिक माहौल देखने का मौका मिला जिसका असर आगे चलकर उनके विचारों और छात्र राजनीति में भी दिखाई दिया.बचपन से ही उनकी रुचि केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही. उन्हें थिएटर, साहित्य, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक मुद्दों में भी दिलचस्पी थी. यही वजह रही कि आगे चलकर उन्होंने शिक्षा और सामाजिक आंदोलनों को साथ लेकर अपना रास्ता चुना.
दिल्ली पब्लिक स्कूल से लेकर JNU तक
नेहा बोरा की स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) सिलीगुड़ी से हुई. इसके अलावा उन्होंने आर्मी पब्लिक स्कूल बेंगलुरु में भी पढ़ाई की. स्कूल के दिनों से ही वह थिएटर और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं.स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की. इसी दौरान उनकी रुचि छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय की गतिविधियों में बढ़ने लगी.इसके बाद उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली (Dr. B.R. Ambedkar University Delhi) से पोस्ट ग्रेजुएशन (M.A.)किया.फिलहाल नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)के स्कूल ऑफ आर्टस एंड एसथेटिक्स (School of Arts and Aesthetics)में पीएचडी (PhD) कर रही हैं. उनका शोध संस्कृति, कला, समाज, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श जैसे विषयों से जुड़ा हुआ है.नेहा कई बार कह चुकी हैं कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने की जगह नहीं होने चाहिए बल्कि वहां छात्रों को सोचने, सवाल पूछने और बहस करने का अवसर भी मिलना चाहिए.
छात्र राजनीति में कैसे हुई एंट्री?
नेहा बोरा ने शुरुआत से ही राजनीति में आने की योजना नहीं बनाई थी. विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने छात्र मुद्दों पर होने वाली बैठकों और अभियानों में हिस्सा लेना शुरू किया.सबसे पहले उन्होंने फीस बढ़ोतरी, छात्रवृत्ति, हॉस्टल सुविधाएं, सार्वजनिक शिक्षा और छात्रों की समस्याओं से जुड़े अभियानों में काम किया. धीरे-धीरे उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और वह ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं.राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले उन्होंने संगठन की दिल्ली इकाई में भी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. लंबे समय तक संगठनात्मक काम करने के बाद वह AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं.
JNU की छात्र नेता के रूप में मिली पहचान
नेहा बोरा फिलहाल AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. AISA लंबे समय से JNU की छात्र राजनीति का एक प्रमुख संगठन माना जाता है.राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान तब और बढ़ी जब उन्होंने शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, सार्वजनिक शिक्षा, रोजगार और छात्र अधिकारों से जुड़े कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई.वह कई बार विश्वविद्यालयों, छात्र सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिक्षा सुधार, परीक्षा व्यवस्था, छात्र प्रतिनिधित्व और रोजगार जैसे मुद्दों पर अपनी बात रख चुकी हैं.
23 दिन की भूख हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान खींचा
नेहा बोरा उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आईं जब उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान लगातार 23 दिनों तक भूख हड़ताल की.इस लंबे अनशन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही. उनका वजन लगभग साढ़े सात किलो तक कम हो गया और ब्लड प्रेशर भी काफी नीचे पहुंच गया था. इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखा.जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तो कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां उनसे मिलने पहुंचीं. अभिनेत्री शबाना आज़मी भी जंतर-मंतर पहुंचीं और उन्होंने मां की तरह उनका हालचाल जाना. अंत में उनके हाथों ही नेहा का अनशन समाप्त हुआ.जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कई बड़े नेता और सामाजिक कार्यकर्ता नेहा बोरा से मिलने पहुंचे.कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया और छात्रों के मुद्दों पर चर्चा की. इसके अलावा अभिनेता शबाना आजमी, सांसद चंद्रशेखर आजाद और कई अन्य सार्वजनिक हस्तियां भी आंदोलन के दौरान उनसे मिलने पहुंचीं.इन मुलाकातों के बाद नेहा बोरा राष्ट्रीय मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी रहीं.
विवादों से भी रहा है नाता
नेहा बोरा का नाम समय-समय पर विवादों में भी आया है. जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान लगाए गए कुछ नारों को लेकर विरोधियों ने सवाल उठाए थे.स्वतंत्र पत्रकार रुचि तिवारी से जुड़े कथित विवाद की भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी हालांकि इन मामलों में अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे रहे हैं और AISA लगातार कहता रहा है कि वह छात्रों के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करता है.
रांची की घटना के बाद फिर चर्चा में
रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर हुए छात्र आंदोलन में जैसे ही नेहा बोरा मंच पर पहुंचीं, कुछ छात्रों ने विरोध जताया और इसी दौरान उन पर स्याही फेंक दी गई. घटना के बाद कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.इस घटना ने एक बार फिर नेहा बोरा को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया. समर्थक इसे छात्र राजनीति पर हमला बता रहे हैं जबकि विरोधी इसे आंदोलन में राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ छात्रों की नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं.इतना तय है कि नेहा बोरा आज देश की सबसे चर्चित छात्र नेताओं में गिनी जाती हैं. उनकी पहचान केवल AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, छात्र अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर लगातार मुखर रहने वाली एक युवा छात्र नेता के रूप में भी बन चुकी है.