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कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने आरएसएस से कागज दिखाने की डिमांड कर डाली. पूछ डाला कि क्या आप रजिस्टर्ड हैं, इसका मोहन भागवत ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा-रजिस्ट्रेशन करना उन्हें पड़ता है, जिन्हें सरकार से कुछ लेना होता है. संघ ऐसा कुछ भी नहीं करता.
मोहन भागवत.
आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कांग्रेस नेता और प्रियांक खरगे को दो टूक जवाब दिया है. प्रियांक खरगे ने कहा था कि आरएसएस को भी पेपर दिखाना होगा कि वो रजिस्टर्ड है या नहीं. उन्होंने संघ प्रमुख को बकायदा पत्र लिखकर कागज मांगे थे. इस पर जब मोहन भागवत से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैं उनके पत्र का जवाब नहीं दूंगा. कई चीजें रजिस्टर्ड नहीं हैं. यहां तक कि हिन्दू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है. जिन्हें सरकार से फंड चाहिए होता है, वे रजिस्टर होते हैं. हम सरकार से कुछ नहीं लेते, इसलिए हमें रजिस्टर्ड होने की कोई जरूरत नहीं.
केरल के त्रिशूर में मोहन भागवत से पूछा गया था कि आरएसएस रजिस्टर्ड क्यों नहीं, इससे लोगों के मन में शक पैदा होता है. प्रियांक खरगे ने जो पत्र लिखा है, उसका क्या जवाब देंगे. इस पर मोहन भागवत ने कहा, यह सब राजनीति है… ये सारे हथकंडे उन लोगों को लुभाने के लिए अपनाए जा रहे हैं जो इसके आदी हो चुके हैं. हमें इन सब चीजों का सामना करना पड़ा है. हम इसके आदी हो चुके हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो हमें लगता है कि कुछ गड़बड़ है. संघ खुलेआम काम करता है, गुप्त रूप से नहीं.
हमारा संविधान सरकार के पास
भागवत ने कहा, संघ की शुरुआत ब्रिटिश काल में जनता की इच्छा से हुई थी. सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया, और वह प्रतिबंध हटा भी लिया गया. एक बार अदालत के आदेश से हटाया गया तो दूसरी बार सत्याग्रह के द्वारा हटाया गया. इसलिए, सरकार को इसके बारे में पता है. उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया, इसका मतलब है कि उन्हें पता था कि आरएसएस कहीं तो मौजूद है. आरएसएस मान्यता प्राप्त है… 100 से अधिक वर्षों में, किसी ने हमें यह नहीं बताया कि पंजीकरण कराना आवश्यक है. हमारा संविधान, लिखित संविधान, सरकार के पास है. हमने इसे 1950 के दशक में प्रस्तुत किया था.
प्रियांक खरगे ने भेजा है भागवत को पत्र
प्रियांक खरगे 13 जून को आरएसएस चीफ मोहन भागवत को पत्र भेजा था. इसमें उन्होंने संघ के रजिस्टर्ड होने और पारदर्शी होने की मांग की थी. ये भी कहा था कि उन्हें कागज तो दिखाना पड़ेगा कि वे रजिस्टर्ड हैं या नहीं. इस पत्र में खरगे ने संघ से 8 सवाल पूछे थे. संघ से फंडिंग का स्रोत बताने को कहा था. आरएसएस प्रमुख ने इस साफ किया है कि वह कोई जवाब नहीं देंगे. इसकी कोई जरूरत नहीं है. यह मांग राजनीतिक है. भागवत ने कहा कि संघ ब्रिटिश के जमाने में बना था.
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