Agency:एजेंसियां
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गुजरात के आनंद जिले में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के बीच एक भावुक मामला सामने आया है. बांग्लादेश में जन्मी काजल को पुलिस ने बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रहने के आरोप में हिरासत में लिया है और उसके डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. काजल के पति तरुण पटेल का दावा है कि दोनों की मुलाकात फेसबुक पर हुई थी, बाद में उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी की और अब उनके दो बच्चे हैं.
तरुण पटेल की काजल से फेसबुक पर मुलाकात हुई थी, जिसके बाद प्यार पनपा और दोनों ने शादी कर ली.
गुजरात में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय पहलू को भी चर्चा में ला दिया है. आनंद जिले के एक युवक ने राज्य सरकार से अपनी बांग्लादेश में जन्मी पत्नी को वापस न भेजने की अपील की है. युवक का कहना है कि उसकी पत्नी ने हिंदू धर्म अपना लिया है और अगर उसे बांग्लादेश भेजा गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है.
आनंद जिले के लांभवेल गांव निवासी तरुण पटेल ने बताया कि उनकी मुलाकात वर्ष 2012-13 में फेसबुक के जरिये बांग्लादेश की रहने वाली काजल से हुई थी. सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. तरुण के मुताबिक दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन काजल को बांग्लादेश में पासपोर्ट नहीं मिल सका. इसी दौरान उसके परिवार की ओर से उस पर किसी और से शादी करने का दबाव बनाया जाने लगा.
तरुण का दावा है कि इसी वजह से काजल करीब दस साल पहले अवैध रूप से भारत आ गई और आनंद पहुंची. यहां दोनों ने हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया और तब से पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं. दंपति के दो बच्चे भी हैं, जिनमें एक आठ साल और दूसरा दो साल का है.
तरुण का कहना है कि भारत आने के बाद काजल ने हिंदू परंपराओं को अपनाया और नियमित रूप से मंदिरों में पूजा-अर्चना करती रही. लेकिन हाल ही में गुजरात पुलिस के ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के दौरान उसकी पहचान अवैध रूप से भारत में रह रही बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हुई. इसके बाद आनंद की स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने उसे हिरासत में ले लिया.
फिलहाल काजल के खिलाफ डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसी को लेकर तरुण ने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से भावुक अपील की है. उनका कहना है कि उनकी पत्नी अब हिंदू धर्म अपना चुकी है और बांग्लादेश लौटने पर उसका परिवार उसे स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने आशंका जताई कि वहां कट्टरपंथी तत्वों से उसकी जान को भी खतरा हो सकता है.
तरुण ने कहा, ‘हमारे दो छोटे बच्चे हैं. अगर उनकी मां को हमसे अलग कर दिया गया तो बच्चों का क्या होगा? वह सिर्फ मुझसे शादी करने और मेरे साथ जीवन बिताने के लिए भारत आई थी.’ उन्होंने यह भी कहा कि परिवार भारतीय नागरिकता पाने के लिए जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन करने को तैयार है. उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मानवीय आधार पर उनकी पत्नी को डिपोर्ट न किया जाए और मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए.
परिवार के मुताबिक काजल फिलहाल एक महिला आश्रय गृह में रखी गई है. हिरासत में लिए जाने के बाद से बच्चे अपनी मां से नहीं मिल पाए हैं. दंपति के बड़े बेटे ध्यान ने भी प्रशासन से अपनी मां को रिहा करने की अपील की है. उसने कहा कि वह अपनी मां के बिना नहीं रह सकता और उसे जल्द घर लौटने दिया जाना चाहिए.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब गुजरात पुलिस राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है. पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक राज्य में 600 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया जा चुका है. इनमें से करीब 60 लोग अकेले आनंद जिले से पकड़े गए हैं.
हालांकि इस विशेष मामले पर पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन यह प्रकरण कानून, मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को जरूर सामने लेकर आया है.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें