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रांची के कृषि मेले में छाई हाइड्रोपोनिक फार्मिंग, बिना मिट्टी के खेती...


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रांची के कृषि मेले में छाई हाइड्रोपोनिक फार्मिंग, खेती के लिए बनेगी गेम चेंजर

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झारखंड में बिना मिट्टी के खेती करने वाली हाइड्रोपोनिक तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है. रांची में आयोजित कृषि व्यापार मेले में विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक की मदद से लोग अपने घर की छत, बालकनी या कमरे में सालभर ताजी सब्जियां उगा सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 8 से 10 हजार रुपये की लागत से छोटा हाइड्रोपोनिक सेटअप तैयार किया जा सकता है. इसमें मिट्टी की जगह पोषक तत्वों से भरपूर पानी का उपयोग किया जाता है.

रांची: सोशल मीडिया पर बिना मिट्टी के आधुनिक तकनीक से खेती करने के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं. अब यह तकनीक झारखंड में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है. रांची के मोराबादी मैदान में झारखंड सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में हाइड्रोपोनिक खेती लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. मेले में सशंका एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी के स्टॉल पर किसानों और आम लोगों को इस आधुनिक खेती तकनीक की जानकारी दी जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोपोनिक तकनीक की मदद से लोग अपने घर की छत, बालकनी या यहां तक कि किसी खाली कमरे में भी सालभर ताजी और पौष्टिक सब्जियां उगा सकते हैं. बढ़ते शहरीकरण और घटती कृषि भूमि के बीच यह तकनीक खेती का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है.

एनएफटी तकनीक से पौधों तक पोषक तत्व
कंपनी के डिप्टी मैनेजर संजीव कुमार ने बताया कि हाइड्रोपोनिक तकनीक उन क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है, जहां मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी नहीं है या खेती योग्य भूमि की कमी है. इस प्रणाली में मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पौधों को पानी में घुले आवश्यक पोषक तत्वों के माध्यम से विकसित किया जाता है. इससे कम जगह में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि इस तकनीक में एनएफटी (न्यूट्रिएंट फिल्म टेक्नोलॉजी) का उपयोग किया जाता है. इसमें मल्टी-लेयर सिस्टम के तहत पीवीसी पाइपों में पोषक तत्वों से युक्त पानी का निरंतर प्रवाह बनाए रखा जाता है. पाइपों के ऊपरी हिस्से में नेट पॉट लगाए जाते हैं, जिनमें कोकोपीट की मदद से पौधों को स्थापित किया जाता है. पौधों की जड़ें लगातार पोषक तत्वों वाले पानी के संपर्क में रहती हैं, जिससे उनकी समान और तेज़ गति से वृद्धि होती है.

पत्तेदार सब्जियों से लेकर स्ट्रॉबेरी तक की खेती संभव
संजीव कुमार ने बताया कि हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाई गई फसलों में एक समान वृद्धि देखने को मिलती है. साथ ही, पौधे मिट्टी से फैलने वाले कई कीटों और रोगों से भी सुरक्षित रहते हैं. इस तकनीक से पालक, धनिया, मेथी, विभिन्न प्रकार के साग, टमाटर, मिर्च, खीरा और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों की सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है. हालांकि, जिन पौधों का तना अत्यधिक कठोर होता है, उन्हें इस प्रणाली में उगाना उपयुक्त नहीं माना जाता. उन्होंने बताया कि छोटे स्तर पर हाइड्रोपोनिक सिस्टम स्थापित करने की लागत लगभग 8 से 10 हजार रुपये से शुरू होती है. आवश्यकता और उत्पादन क्षमता के अनुसार इसका आकार बढ़ाया जा सकता है, जिससे लागत भी बढ़ती है.

बंद कमरे में भी की जा सकती है खेती
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति बंद कमरे के भीतर हाइड्रोपोनिक खेती करना चाहता है, तो वहां ब्रॉड स्पेक्ट्रम व्हाइट एलईडी लाइट का उपयोग किया जाता है. यह लाइट सूर्य के प्रकाश का विकल्प बनकर पौधों को आवश्यक प्रकाश उपलब्ध कराती है. इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर होती है. जड़ें मजबूत बनती हैं और पौधों में हरी-भरी पत्तियों का विकास होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोपोनिक खेती भविष्य की खेती का एक महत्वपूर्ण और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकती है. यह तकनीक न केवल किसानों बल्कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी खेती के नए अवसर खोल रही है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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