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वन्यजीवों को प्लास्टिक के खतरे से बचाएगा पलामू टाइगर रिजर्व, जानिए क्या...


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वन विभाग बेतला नेशनल पार्क को ‘नो प्लास्टिक जोन’ बनाने जा रहा है. पर्यटकों के कारण फैल रहे प्लास्टिक कचरे से वन्यजीवों को बचाना इसका मुख्य उद्देश्य है. अब पर्यटकों को पत्तल-दोने के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इससे जंगल और जानवर दोनों सुरक्षित रहेंगे.

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पलामूः झारखंड के लातेहार जिले में पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में कई प्रमुख पर्यटन स्थल बेतला को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने नई तैयारी शुरू की है. जहां पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ बेतला में प्लास्टिक कचरे की समस्या भी सामने आती है. ऐसे में विभाग बेतला को नो प्लास्टिक जोन के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है. जिसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त रखने के साथ जंगल और वन्यजीवों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से बचाना है.

दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व में वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बेतला राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. पर्यटक अपने साथ खाने-पीने की सामग्री और अन्य सामान लेकर आते हैं, जिससे कई बार प्लास्टिक की बोतल, पॉलिथीन और पैकेजिंग कचरा जंगल के आसपास पहुंच जाता है. यह कचरा पर्यावरण के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में प्लास्टिक के इस्तेमाल और उसके कचरे को नियंत्रित करना जरूरी है.

डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि वन विभाग की नई तैयारी के तहत बेतला में प्रवेश से लेकर पर्यटन क्षेत्र के भीतर तक प्लास्टिक के इस्तेमाल को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा रहा है. पर्यटकों को भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने और कचरा निर्धारित स्थान पर डालने के लिए जागरूक किया जाएगा. विभाग का प्रयास है कि बेतला आने वाले पर्यटक जंगल की खूबसूरती का आनंद लेने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभाएं. जिसके लिए पर्यटकों को पत्तल और दोने में खाना परोसने को लेकर तैयारी चल रही है.

आगे कहा कि बेतला केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वन्यजीवों और जैव विविधता का महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यहां पाए जाने वाले वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के लिए जंगल को साफ और प्रदूषण मुक्त रखना बेहद जरूरी है. प्लास्टिक का कचरा जंगल में पहुंचने से जानवरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसलिए प्लास्टिक नियंत्रण को पर्यटन प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है.

आगे कहा कि बेतला में नो प्लास्टिक जोन की पहल सफल होती है तो इसका सीधा लाभ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा. साथ ही पर्यटकों को भी स्वच्छ और बेहतर पर्यटन अनुभव मिल सकेगा. वन विभाग की कोशिश है कि बेतला आने वाला हर पर्यटक यहां से जंगल की खूबसूरती और प्रकृति संरक्षण का संदेश लेकर लौटे. आने वाले समय में बेतला को और अधिक स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…

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