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Purnia Emotional Story: पूर्णिया में 80 वर्षीय पतसिया देवी बेटों पर बोझ न बनने के लिए सड़क किनारे लिट्टी बेच रही हैं. उनका स्वाभिमान और मेहनत समाज के लिए मिसाल है. यह कहानी बदलते पारिवारिक रिश्तों पर भी सवाल उठाती है.
पूर्णिया: कहते हैं कि जब भी ममता और त्याग की बात आती है, तो मां का चेहरा सबसे पहले सामने आता है. मां का आंचल हमेशा बच्चों के लिए सुरक्षा और आशीर्वाद का काम करता है. लेकिन पूर्णिया के पॉलीटेक्निक चौक स्थित पेट्रोल पंप के पास सड़क किनारे बैठी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला पतसिया देवी आज समाज के हर उस इंसान को सोचने पर मजबूर कर रही हैं, जो रिश्तों की अहमियत समझता है.
कमजोर शरीर, लेकिन मजबूत आत्मसम्मान 80 साल की इस उम्र में पतसिया देवी का शरीर भले ही ढल चुका हो और चेहरे पर झुर्रियां साफ दिखती हों, लेकिन उनका आत्मसम्मान और स्वाभिमान आज भी उतना ही मजबूत है. उम्र के इस पड़ाव पर जहां इंसान को अपनों के सहारे और आराम की जरूरत होती है. वहीं पतसिया देवी किसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद मेहनत करके अपना पेट पाल रही हैं.
जीते जी बेटों पर नहीं बनना चाहती बोझ
‘जीते जी बच्चों पर बोझ नहीं बनना चाहती’ पतसिया देवी का एक बेटा (जो चालक का काम करता है) और सात बेटियां हैं. लेकिन उनका कहना है कि वे अपने जीते जी परिवार या बच्चों पर बोझ नहीं बनना चाहतीं. उम्र और शारीरिक कमजोरी की परवाह किए बिना वे रोज सुबह 5 बजे ही सड़क किनारे अपनी लिट्टी की दुकान पर पहुंच जाती हैं. वहां वे अपने हाथों से स्वादिष्ट लिट्टी तैयार करती हैं. आने-जाने वाले ग्राहकों को खिलाती हैं. उनका मानना है कि स्वाभिमान से जीने के लिए मेहनत जरूरी है, न कि किसी के आगे हाथ फैलाना.
बदलते पारिवारिक रिश्तों पर बड़ा सवाल
80 साल की उम्र में अपनी मेहनत की कमाई से पेट भरती यह बुजुर्ग मां आज हर किसी के लिए मिसाल है. लेकिन इसके साथ ही यह कहानी बदलते सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक रिश्तों पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है. जिस मां ने अपने बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, आज उसी मां को जीवन के अंतिम पड़ाव में सड़क किनारे आकर क्यों जूझना पड़ रहा है? पतसिया देवी की यह कहानी केवल एक बुजुर्ग महिला का संघर्ष नहीं, बल्कि मां की अटूट ममता, स्वाभिमान और जीवन से कभी न हार मानने के जज्बे की कहानी है.
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अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …
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