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अब पूरा खेत नहीं, सिर्फ बीमार फसल पर होगा स्प्रे! खेती में AI वाली नई तकनीक

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Ai smart drone farming : खेती में अब एडवांस टेक्नोलॉजी आया है जो कि सीधे स्प्रे करने के बजाय पहले खेतों और फसलों की स्कैनिंग करते हैं. GPS, NVDI और क्रॉप मॉनिटरिंग कैमरा से लैस ये ड्रोन फसलों में बीमारी, पोषक तत्वों की कमी और प्रभावित हिस्सों की पहचान कर काम करता है.


बेगूसराय : आजकल खेती में किसान आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं . इन तकनीक का प्रयोग करके किसान अच्छी आय भी प्राप्त कर रहे हैं. इन्हीं तकनीक में ड्रोन का उपयोग भी बढ़ रहा है . खेती में ड्रोन का प्रयोग करने से श्रम और समय दोनों की बचत होती है . अब तक आपने देखा होगा कि ड्रोन के प्रयोग में एक बीघा के खेत या आम लीची पर स्प्रे करना है पूरे खेतों में ड्रोन काम करते हैं . स्प्रे करती है. लेकिन अब खेती किसानी के मार्केट में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के ड्रोन की एंट्री हो गई है . आज के समय में बाजार में ऐसे एडवांस ड्रोन आ गए हैं जो पहले खेत और फसल की स्कैनिंग करते हैं, बीमारी या समस्या वाले हिस्से की पहचान करते हैं और उसके बाद वहीं पर स्प्रे करते हैं. यही वजह है कि यह तकनीक किसानों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन रही है. ऐसे में लोकल 18 पर भी चर्चा इसी मॉडल पर.

अब किसानों के लिए उपलब्ध है एडवांस टेक्नोलाजी का ड्रोन
कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय के यंत्र एक्सपर्ट विशेषज्ञ विकास कुमार ने बताया कि नई पीढ़ी के ड्रोन अब सामने आएं हैं. इसे एडवांस टेक्नोलाजी का ड्रोन कहते हैं. यह ड्रोन GPS, NVDI तकनीक और क्रॉप मॉनिटरिंग कैमरे से लैस होते हैं. ये ड्रोन कमांड मिलने के बाद खेत की मैपिंग करते हैं और फसल की स्थिति का विश्लेषण करते हैं.

स्कैनिंग के दौरान जहां बीमारी, पोषक तत्वों की कमी या अन्य समस्या होती है, वहां अलग रंग के संकेत दिखाई देते हैं. इसके बाद ड्रोन उसी हिस्से पर सटीक तरीके से स्प्रे करता है. इसके लिए ड्रोन में पहले कमांड तय कर दिए जाते हैं. काम कैसे करना है.

ड्रोन के इस्तेमाल से किसानों का समय और श्रम दोनों बच रहे हैं. जो काम पहले घंटों में पूरा होता था, वह अब कुछ मिनटों में हो जाता है. इससे दवा की बचत होती है और फसल पर दवा का असर भी बेहतर तरीके से पहुंचता है.

कीमत सुनकर चौंक जाएंगे, लेकिन है बचत का रास्ता
विकास कुमार ने बताया कि अगर कोई किसान अकेले ड्रोन खरीदना चाहता है तो उसे 4 से 5 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं. वहीं, किसान उत्पादक संगठन (FPO), कस्टम हायरिंग सेंटर या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यही ड्रोन करीब 2 से 3 लाख रुपये में उपलब्ध हो सकता है. 10 लीटर क्षमता वाला ड्रोन किसानों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
इस ड्रोन में लिथियम बैटरी का उपयोग किया जाता है. बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में करीब 90 मिनट का समय लगता है. एक बार चार्ज होने के बाद ड्रोन 15 से 20 मिनट तक लगातार काम कर सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैटरी 30 प्रतिशत से नीचे पहुंचने से पहले ड्रोन को सुरक्षित रूप से लैंड करा लेना चाहिए.

बीमारी पहचानकर वहीं करता है स्प्रे
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह ड्रोन केवल उड़कर दवा नहीं छिड़कता. मिले कमांड के आधार पर जिस बीमारी पर निशाना लगाने के लिए कहा गया है उसी बीमारी पर यह निशाना लगाता है. यह सॉफ्टवेयर के जरिए बीमारी वाले हिस्सों की पहचान करता है. मैपिंग पूरी होने के बाद ड्रोन ठीक उसी जगह स्प्रे करता है जहां जरूरत होती है. इससे दवा की बर्बादी कम होती है और खेती ज्यादा वैज्ञानिक बनती है.

About the Author

Amit Singh

8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें



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