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Ranchi Suraj Success Story: रांची के सूरज को इलाहाबादा यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद बैंक में नौकरी मिल गई. उन्होंने नौकरी छोड़कर मखाना, किनुआ, चिया का बिजनेस शुरू किया. आज उनका ब्रांड ऑर्गेनिक मंच अब ब्लिंकिट समेत बड़े प्लेटफार्म पर बिक रहा है. जहां रोज कई ऑनलाइन आर्डर मिलते हैं. इससे वह लाखों रुपये महीना कमा रहे हैं.
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के सूरज ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और उसके बाद बैंक की नौकरी की, लेकिन बैंक की अच्छी खासी नौकरी इन्होंने बीच में ही छोड़ दी और आज वह मखाना का बिजनेस करते हैं. कीनुआ व चिया जहां वह मध्य प्रदेश के किसान से कॉन्ट्रैक्ट के तहत लाते हैं. साथ ही मखाना बिहार से आता है. इन दोनों की पैकेजिंग करके वह इसे बेचने का काम करते हैं. इससे वह तगड़ी कमाई भी करते हैं. आइये जानते हैं उनके बारे में.
आज सूरज की पैकेजिंग ब्लिंकिट से लेकर हर बड़े प्लेटफार्म पर उपलब्ध है. आज आलम यह है कि दिल्ली में हर दिन 50 से अधिक लोग आर्डर करते हैं और रांची में 15 से अधिक, आज उनका खुद का ब्रांड ‘ऑर्गेनिक मंच’. उन्होंने बताया कि पहले तो लोगों ने मजाक उड़ाया की अपना कंपनी खड़ा करेंगे, लेकिन आज वही लोग आर्डर करते हैं.
लोगों के हेल्थ को ध्यान में रखकर शुरू किया बिजनेस
सूरज बताते हैं कि वह लोगों के हेल्थ को ध्यान में रखते हुए इस बिजनेस को शुरू किए हैं. दरअसल, किनुआ जो है, इसमें कैलरी की मात्रा बहुत कम, उच्च फाइबर व जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इसे व्यक्ति हर दिन अपने ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकता है बिना वजन का टेंशन लिए. इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं, जो नॉन वेजिटेरियन हैं, उनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है.
उन्होंने बताया कि वह देखे कि अब लोग अपने हेल्थ के प्रति जागरूक हो रहे हैं. किनुआ खा रहे हैं, चिया सीड का पानी पी रहे हैं. इसके अलावा मखाना को रोस्ट करके या दूध के साथ मखाना लेना पसंद करते हैं. उन्होंने सोचा क्यों ना इसी चीज को बिजनेस के तौर पर शुरू किया जाए और फिर उन्होंने किसानों से कांटेक्ट के तहत यह सारी चीज लेना शुरू किया और वह भी एकदम हाई क्वालिटी की.
खुद करते हैं पैकेजिं
सूरज आगे बताते हैं कि वह खुद पैकेजिंग करते हैं और इसकी सबसे खास बात है कि उनका पैकेजिंग भी इको फ्रेंडली है. मतलब वह प्लास्टिक का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करते और जो पैकेजिंग होता है. उसके ऊपर हैंड पेंटिंग होता है, मतलब केमिकल पेंटिंग बिल्कुल नहीं होता है. इस तरीके से वह प्रकृति और स्वच्छ वातावरण को भी बढ़ावा दे रहे हैं.
यह सारी चीज उन्होंने जब शुरू किया तब स्कूटी से सब चीज किया करते थे. हर चीज को लाना, उसका पैकेजिंग करना. तब लोगों ने मजाक उडाया की अब ये अपना ब्रैंड बनाने चले हैं, लेकिन आज आलम यह है कि वही लोग उनके ब्रांड को खरीदना पसंद करते हैं और लगातार ऑनलाइन ऑर्डर भी करते हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें