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सिटी रिपोर्टर | बोकारो गरगा डैम की भूमि और उसके जल उपयोग को लेकर शनिवार को बोकारो परिसदन में एक अहम समन्वय बैठक हुई। झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिला प्रशासन और बीएसएल के आला अधिकारी आमने-सामने थे। बैठक में मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने दो टूक शब्दों में कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत पानी और नदियां राज्य सूची का विषय हैं, इसलिए नदियों का असली स्वामित्व राज्य सरकार के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएसएल प्रबंधन गरगा डैम का किसी भी तरह से व्यावसायिक उपयोग नहीं कर सकता है। राज्य सरकार और बीएसएल प्रबंधन के बीच जारी मतभेदों को दूर करने के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति नियमित बैठकें कर अधिकार क्षेत्र और पुराने एग्रीमेंट्स के डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालेगी। 20 गांवों के विस्थापितों को मंत्री ने निर्देश दिया कि विस्थापित गांवों को पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाए ताकि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, हालांकि भूमि का स्वामित्व बीएसएल के पास ही रहेगा। प्लांट में कार्यरत ठेका श्रमिकों की गंभीर समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार करने और कर्मचारियों की सुरक्षा की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। बैठक में उपायुक्त अजय नाथ झा, एसपी नाथू सिंह मीना और बीएसएल की ईडी (एचआर) राजश्री बनर्जी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। ज्ञात हो कि विभाग के अनुसार बीएसएल पर लगभग 1500 करोड़ रुपए का जल कर बकाया है। बीएसएल की ओर से अकेले रेलवे को रोजाना आठ लाख गैलन पानी दिया जा रहा है। यह विवाद साल 2011 से चल रहा है। सरकार का कहना है कि यह डैम कानूनी रूप से बीएसएल की संपत्ति नहीं है। इस संबंध में पूर्व में भी बैठक हो चुकी है और बीएसएल से कागजात की भी मांग की गई थी जो अब तक प्राप्त नहीं हुआ है।
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