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रांची यूनिवर्सिटी में वेतन और पेंशन का संकट गहराने लगा है। मार्च 2026 के बाद से शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन तथा पेंशन मद में सरकार से राशि नहीं मिली है। इस कारण विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक अपने आंतरिक संसाधनों से भुगतान करता रहा है, लेकिन लगातार तीन महीने तक यह व्यवस्था चलाने के बाद विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति अब जवाब देने लगी है। स्थिति यह है कि जून महीने के वेतन और पेंशन का भुगतान भी संकट में पड़ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर कहा है कि यदि शीघ्र राशि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो जून से वेतन-पेंशन का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा। रांची यूनिवर्सिटी हर महीने वेतन और पेंशन मद में करीब 25 करोड़ रुपए खर्च करती है। मार्च के बाद से विश्वविद्यालय ने अपने आंतरिक संसाधनों से 75 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। इसके अलावा नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के मानदेय का भुगतान भी अपने संसाधनों से किया गया। इन सभी मदों को मिलाकर अब तक लगभग 95 करोड़ रुपए आंतरिक कोष से खर्च किए जा चुके हैं। अल्पसंख्यक कॉलेजों में स्थिति गंभीर, मार्च से ही वेतन लंबित वित्तीय संकट का असर केवल विश्वविद्यालय मुख्यालय और संबद्ध इकाइयों तक सीमित नहीं है। रांची यूनिवर्सिटी से संबद्ध अल्पसंख्यक कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी मार्च महीने से लंबित है। इन संस्थानों में कार्यरत कर्मियों को पिछले कई महीनों से नियमित भुगतान नहीं मिल पाने के कारण भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विवि बोला- 95 करोड़ अपने संसाधन से दिए, आगे संभव नहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने सरकार को भेजे गए पत्र में वित्तीय संकट की गंभीरता से अवगत कराया है। विवि का कहना है कि अपने संसाधनों से 95 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, अब आगे भुगतान करना संभव नहीं है। यदि जल्द ही अनुदान जारी नहीं हुआ, तो जून का वेतन और पेंशन भुगतान पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। भुगतान रुकने की स्थिति में शिक्षकों, कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच असंतोष बढ़ने की आशंका है। समझिए रांची यूनिवर्सिटी का वेतन-पेंशन का गणित अधीनस्थ इकाइयाँ: रांची यूनिवर्सिटी के अधीन 13 अंगीभूत कॉलेज, 30 स्नातकोत्तर (पीजी) विभाग और विवि मुख्यालय संचालित हैं। लाभार्थी: विश्वविद्यालय के अंतर्गत 2500 से अधिक शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनधारी आते हैं, जिन्हें नियमित वेतन एवं पेंशन का भुगतान किया जाता है। मासिक खर्च: हर महीने करीब 25 करोड़ रुपए वेतन और पेंशन मद में खर्च होते हैं। आंतरिक भुगतान: मार्च 2026 के बाद से सरकार की ओर से राशि नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय ने अपने आंतरिक संसाधनों से भुगतान जारी रखा। अतिरिक्त बोझ: वेतन-पेंशन के अलावा नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के मानदेय का भुगतान भी विश्वविद्यालय को अपने ही संसाधनों से करना पड़ा। अल्पसंख्यक कॉलेजों की स्थिति: अल्पसंख्यक कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी मार्च से ही लंबित चल रहा है।
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