नई दिल्ली (NEET UG Re-Exam 2026). मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र का हर पड़ाव सिर्फ नंबर बनकर रह जाता है. ऐसा ही कुछ नीट की परीक्षा के दौरान लखनऊ के एक सेंटर पर देखने को मिला. आलमबाग के गुरु नानक महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर नीली जींस, नीली शर्ट, स्टाइलिश काला चश्मा और हाथ में घड़ी पहने 69 साल के बुजुर्ग अपनी कार से उतरे तो वहां खड़े युवा एस्पिरेंट्स से लेकर सुरक्षाकर्मी तक हक्के-बक्के रह गए. ये थे चंदरनगर के रहने वाले अशोक बहार, जो इस उम्र में डॉक्टर बनने का सपना लेकर परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन सेंटर के गेट पर ही उनकी सुरक्षाकर्मियों से बहस हो गई.
सपनों की कोई उम्र नहीं होती: कौन हैं अशोक बहार?
चश्मा और बेल्ट उतरवाने पर क्यों भड़के अशोक बहार?
अशोक बहार लखनऊ के आलमबाग स्थित गुरु नानक महाविद्यालय गर्ल्स इंटर कॉलेज केंद्र पर पहुंचते ही आकर्षण का केंद्र बन गए. चेकिंग के वक्त जब उनका चश्मा और बेल्ट उतारा जाने लगा तो वह नाराज हो गए. उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को समझाने की कोशिश की कि इस उम्र में इन चीजों के बिना उन्हें काफी दिक्कत होगी. लेकिन एनटीए के कठोर प्रोटोकॉल के कारण सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एक न सुनी और आखिरकार उन्हें बिना बेल्ट और चश्मे के ही परीक्षा हॉल के अंदर जाना पड़ा.
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
नीट यूजी री-परीक्षा देकर बाहर आए अशोक बहार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के इस ढर्रे और बार-बार परीक्षा कराए जाने के माहौल पर नाराजगी जताई. उन्होंने घोषणा की है कि वह सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने जा रहे हैं. उनकी मांग है कि नीट परीक्षा में बैठने वाले वरिष्ठ नागरिक अभ्यर्थियों के लिए कम से कम 1 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए.
पुराने स्कोर पर काउंसलिंग की मांग
अशोक बहार ने उन लाखों उम्मीदवारों का दर्द भी साझा किया जो दोबारा परीक्षा के जाल में फंस गए हैं. उनका कहना है कि जो अभ्यर्थी मानसिक तनाव या किसी अन्य कारण से दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते थे, उन्हें उनके पुराने स्कोर के आधार पर ही काउंसलिंग में बैठने का अवसर दिया जाना चाहिए था. बकौल अशोक- दवाओं और मेडिकल फील्ड की मुझे अच्छी जानकारी है. लेकिन मैं किसी को पर्चा लिखकर नहीं दे सकता क्योंकि मेरे पास डिग्री नहीं है. सफलता मिले या न मिले, कोशिश बंद नहीं होनी चाहिए.
सख्त पहरे में परीक्षा, अफवाहों से पेरेंट्स परेशान
री-नीट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इतनी अभेद्य थी कि अभ्यर्थियों को अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा. कलावा, घड़ी, चेन, हिजाब, नाक की कील, जूते-मोजे, मोबाइल फोन जैसी तमाम चीजें गेट पर ही उतरवा ली गईं. बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही एंट्री मिली. इस सख्त पहरे के बीच कई पेरेंट्स ने नाराजगी भी जताई. उनका कहना था कि बार-बार पेपर लीक की चर्चा और री-एग्जाम की नौबत आने से मनोबल टूट जाता है. सरकार को ऐसा फूलप्रूफ सिस्टम बनाना चाहिए कि बच्चों का साल और भविष्य बर्बाद होने से बच सकें.