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मंदिर के पुजारी ने कहा कि ये युवा विशेष कर वैवाहिक जीवन शुरू करने से पहले मंगल दोष के कारण आने वाली बाधाओं के निवारण की आस लिए मंगलनाथ मंदिर पहुंचते है. मंगलनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र भारती के अनुसार, भगवान मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और शुभता का प्रतीक माना जाता है. यहां श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है.
धार्मिक नगरी उज्जैन मे सैकड़ो मंदिर मे जो अपने आप मे कई रहस्य समेटे हुए है. ऐसा ही एक मंदिर खाकचौक स्थित मंगलनाथ के नाम से जाना जाता है. जहाँ मोक्ष दयनी माँ शिप्रा के तट पर विराजमान है. यह स्थान कोई मामूली नहीं बल्कि इस स्थल को नवग्रहों के अधिपति मंगल और मंगल की जन्मस्थली कहा जाता है. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि ये युवा विशेष कर वैवाहिक जीवन शुरू करने से पहले मंगल दोष के कारण आने वाली बाधाओं के निवारण की आस लिए मंगलनाथ मंदिर पहुंचते है.
मंगलनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र भारती के अनुसार, भगवान मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम और शुभता का प्रतीक माना जाता है. यहां श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है, वे मंगलनाथ मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना और मंगल दोष निवारण अनुष्ठान करवाते हैं. इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में सकारात्मकता तथा खुशहाली का संचार होता है. इसलिए देश ही नहीं विदेश से भी यहां श्रद्धांलु भगवान की पूजा करने आते है.
आखिर कैसे हुई मंदिर की उतपति
मंगलनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा स्कंदपुराण के अवंतिकाखंड में मंगलनाथ मंदिर की उत्पत्ति की कथा मिलती है. कथा के अनुसार अंधकासुर नाम का एक शक्तिशाली दैत्य था, जिसे भगवान शिव से यह वरदान मिला था कि उसके रक्त की हर बूंद से नया दैत्य पैदा होगा. उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर देवताओं और आम लोगों ने शिव की आराधना की. इसके बाद शिव और अंधकासुर के बीच भयानक युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान शिवजी के पसीने की बूंदें धरती पर गिरीं, जिससे धरती फट गई और मंगल ग्रह की उत्पत्ति हुई. अंधकासुर का रक्त उस नए ग्रह में समा गया, इसी कारण मंगल ग्रह की भूमि लाल मानी जाती है. बाद में शिव ने उस ग्रह को पृथ्वी से अलग कर आकाश में स्थापित कर दिया. इसी मान्यता के चलते मंगलनाथ मंदिर में मंगल को शिव का ही स्वरूप माना जाता है. यहां पूजा कर मंगल दोष शांत करने की परंपरा चली आ रही है.
पूजा से कट जाता है मंगल दोष
उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा और मंगल शांति कराने से मांगलिक दोष का प्रभाव कम होता है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है. उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धांलु त्रिभुवन सिंह भी इसी आस्था के साथ मंदिर पहुंचे. उन्होंने बताया कि उन्हें मंगल दोष है और परिवार की सलाह पर वे मंगलनाथ भगवान का आशीर्वाद लेने आए हैं, ताकि मन को शांति मिले और उनका वैवाहिक जीवन सुखमय बन सके. मंगल दोष से राहत पाने की आस में मंदिर में 20 से 35 वर्ष के युवाओं व युवतिओ की संख्या भारी मात्रा मे रोजाना देखी जाती है. राजस्थान से आए ईश्वर सिंह ने बताया कि वैवाहिक बाधाओं को दूर करने की मान्यता सुनकर वे दर्शन के लिए आए हैं. वहीं, जबलपुर के हर्ष परमार का कहना है कि रिश्तों में आ रही परेशानियों के समाधान के लिए उन्होंने यहां विशेष पूजा करवाई. हमारे कई रिस्तेदार ने यहां आके पूजा कराई उनके जल्द विवाह हुए है.