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Sugarcane Farming: झारखंड के देवघर समेत आसपास के क्षेत्रों में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मानसून ने राज्य में दस्तक तो दे दी है, लेकिन देवघर जिले में अभी तक अच्छी और लगातार बारिश नहीं हुई है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे बारिश का इंतजार करने के बजाय अभी से खेतों में जरूरी तैयारियां पूरी कर लें. समय रहते कुछ महत्वपूर्ण कार्य कर लेने से मानसून के दौरान फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन भी बेहतर मिल सकता है. वहीं लापरवाही बरतने पर तेज हवा और अधिक बारिश की वजह से फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है.
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस समय गन्ने की फसल में मिट्टी चढ़ाने का काम अवश्य कर लेना चाहिए. मानसून के दौरान खेत की मिट्टी नरम हो जाती है और गन्ने के पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे में तेज हवा या लगातार बारिश होने पर पौधों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है.
उन्होंने कहा कि जब गन्ने के पौधे जमीन पर गिर जाते हैं तो उनकी बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए किसानों को समय रहते पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाकर उन्हें मजबूत सहारा देना चाहिए. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और वे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को आसानी से सहन कर पाते हैं.
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, मिट्टी चढ़ाने से पहले खेत में जैविक खाद का प्रयोग करना और भी लाभदायक साबित हो सकता है. किसान अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग कर सकते हैं. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पौधों को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं.
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यदि गोबर की खाद उपलब्ध नहीं हो तो किसान जैविक खाद के अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और फसल अधिक स्वस्थ रहती है. साथ ही जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है, जिसका लाभ भविष्य की फसलों को भी मिलता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है. कई बार लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो जाता है. गन्ने की फसल में लंबे समय तक जलभराव रहने से जड़ें सड़ने लगती हैं और कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है.
इसलिए किसानों को अभी से खेतों में नालियां बनाकर पानी निकासी की उचित व्यवस्था कर लेनी चाहिए. खेत में कहीं भी पानी जमा नहीं होना चाहिए. बेहतर जल निकासी व्यवस्था से फसल सुरक्षित रहती है और पौधों की वृद्धि भी अच्छी होती है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान बारिश शुरू होने से पहले मिट्टी चढ़ाने, जैविक खाद डालने और जल निकासी की व्यवस्था जैसे जरूरी कार्य पूरा कर लेते हैं तो मानसून का मौसम उनके लिए लाभकारी साबित हो सकता है.
इन उपायों से फसल मजबूत होगी, पौधे गिरने से बचेंगे और उत्पादन में भी वृद्धि होगी. इसलिए गन्ना किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम को ध्यान में रखते हुए अभी से खेतों की तैयारी पूरी कर लें, ताकि मानसून के दौरान फसल सुरक्षित रहे और उन्हें बेहतर पैदावार के साथ अधिक आमदनी प्राप्त हो सके.