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Air India Flight 182: कनिष्क बम विस्फोट में मारे गए अधिकांश लोग कनाडाई नागरिक थे, लेकिन इस आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था. अब, दशकों बाद कनाडा की आधिकारिक स्वीकारोक्ति ने उस काले सच पर एक बार फिर वैश्विक बहस छेड़ दी है.
एअर इंडिया फ्लाइट 182 के ब्लास्ट में विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे. (सांकेतिक तस्वीर)
Air India Flight 182: करीब चार दशक बाद कनाडा ने आखिरकार उस सच को स्वीकार कर लिया है, जिसे लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे थे. कनाडाई खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) को बम से उड़ाने के पीछे कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था. 23 जून 1985 को हुए इस भीषण आतंकी हमले में 329 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी. यह विमान अटलांटिक महासागर के ऊपर विस्फोट के बाद टुकड़ों में बिखर गया था. इस हादसे को कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है.
सीएसआईएस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि “कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा लगाए गए बम ने एयर इंडिया फ्लाइट 182 को नष्ट कर दिया था, जिससे विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई.” एजेंसी ने इस घटना को “घृणित और जघन्य आतंकवादी कृत्य” बताया. सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले 40 वर्षों में पहली बार कनाडा की किसी प्रमुख सुरक्षा एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से खालिस्तानी आतंकियों की भूमिका को स्वीकार किया है.
यह बयान ऐसे समय आया है जब खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर भारत और कनाडा के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है. सीएसआईएस ने कहा कि एयर इंडिया कनिष्क त्रासदी न केवल सैकड़ों परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म है, बल्कि यह कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के इतिहास का भी एक निर्णायक और दर्दनाक अध्याय है.
कनाडा के प्रधानमंत्री ने 23 जून को इस बम धमाके को “हमारे देश के इतिहास का सबसे घातक हमला” बताया और कहा कि कनाडा हर तरह के हिंसक चरमपंथ के खिलाफ है. प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा, “आज से 41 साल पहले, एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में हुए बम धमाके में 329 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक भी शामिल थे. यह कनाडा के इतिहास का अब तक का सबसे घातक आतंकवादी हमला है.
1985 में क्या हुआ था
23 जून 1985 को, एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (जिसे ‘कनिष्क’ के नाम से भी जाना जाता है) मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली जा रही थी. तभी चेक-इन किए गए सामान में छिपा एक बम हवा में ही आयरलैंड के तट के पास फट गया. यह घटना विमान के हीथ्रो एयरपोर्ट पर उतरने से लगभग 45 मिनट पहले हुई थी. विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज़्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. इस बम धमाके के लिए सिख चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. यह हमला 1984 में स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बदले में किया गया था.
विस्फोटक वाला सूटकेस एक ऐसे यात्री ने चेक-इन किया था जो कभी फ्लाइट में सवार ही नहीं हुआ. मारे गए लोगों में से 268 कनाडाई नागरिक थे (जिनमें से ज़्यादातर भारतीय मूल के थे), जबकि 24 भारतीय नागरिक थे. सर्च टीमों को अटलांटिक महासागर से सिर्फ़ 131 शव मिले.
कनाडा के जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह बम धमाका ऑपरेशन ब्लू स्टार के बदले में सिख अलगाववादियों ने किया था. हाल ही में, पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री बनने के बाद से कनाडा और भारत ने रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. दोनों देशों के रिश्ते तब बहुत खराब हो गए थे जब 2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का संभावित हाथ होने का आरोप लगाया था.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें