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CBSE 3-Language Policy: क्या आपके बच्चे को भी बदलनी होगी भाषा? शिक्षा...


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CBSE Three Language Policy: सीबीएसई की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हर कन्फ्यूजन दूर कर दिया है. क्लास 7, 8 और 9 में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को अभी विषय बदलने की जरूरत नहीं होगी. यह नियम केवल कक्षा 6 में आने वाले नए स्टूडेंट्स पर लागू होगा. जानिए डिटेल.

क्या आपके बच्चे को भी बदलनी होगी भाषा? शिक्षा मंत्री ने दूर कर दिया कंफ्यूजनZoom

CBSE Three Language Policy: सीबीएसई की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर कई लोग कंफ्यूजन में हैं

नई दिल्ली (CBSE Three Language Policy). सीबीएसई स्कूलों में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी (तीन-भाषा नियम) को लेकर पिछले कुछ दिनों से जो कन्फ्यूजन बना हुआ था, उस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विराम लगा दिया है. शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि यह नया नियम केवल उन स्टूडेंट्स पर लागू होगा जो इस साल कक्षा 6 में एडमिशन ले रहे हैं. जो स्टूडेंट्स इस समय कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने भाषा के विषय बदलने की जरूरत नहीं है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि सीबीएसई के पिछले नोटिस में स्थिति साफ नहीं थी, जिसकी वजह से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स कंफ्यूज हो रहे थे. अब यह भ्रम दूर कर दिया गया है. जो स्टूडेंट्स फिलहाल दो विदेशी भाषाओं के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, वे कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा तक उन्हीं विषय को जारी रख सकते हैं. सीबीएसई जल्द ही अपनी गवर्निंग काउंसिल की बैठक के बाद इस संबंध में रिवाइज्ड आदेश जारी करेगा.

क्या है R1, R2 और R3 फ्रेमवर्क?

इस नई पॉलिसी को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए भाषाओं को 3 अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है, जिसे R1, R2 और R3 फ्रेमवर्क कहा जाता है:

  • R1 (पहली भाषा): यह मुख्य रूप से पढ़ाई का माध्यम होगी (जैसे हिंदी या अंग्रेजी).
  • R2 (दूसरी भाषा): यह R1 से अलग कोई दूसरी भाषा होगी.
  • R3 (Third Language): यह तीसरी भाष R1 और R2 दोनों से अलग होगी.

इस सिस्टम की सबसे जरूरी शर्त है कि चुनी गईं इन 3 भाषाओं में से कम से कम 2 भाषाएं भारतीय (Native Indian Languages) होनी अनिवार्य हैं.

सिर्फ 1.3% स्टूडेंट्स पर ही था बदलाव का असर

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कक्षा 6 से 8 तक 3 भाषाएं पढ़ाना जरूरी है. भारत के लगभग 90% छात्र (करीब 25 करोड़) पहले से ही 3 भाषाएं पढ़ रहे हैं. तमिलनाडु और सीबीएसई को छोड़कर बाकी सभी राज्य बोर्ड कक्षा 10 तक यही पैटर्न फॉलो करते हैं. सीबीएसई के अंदर भी 99% छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं. केवल 1.3% छात्र ऐसे हैं जो दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे थे. नए स्पष्टीकरण के बाद अब उन्हें भी परेशान होने की जरूरत नहीं है.

विदेशी भाषाओं पर नहीं लगेगा बैन

कई स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को लग रहा था कि इस नियम के आने से स्कूलों से विदेशी भाषाएं हटा दी जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कर दिया है कि विदेशी भाषाओं को हटाया नहीं जा रहा है, छात्र चाहें तो तीन मुख्य भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा को चुन सकते हैं. मुख्य नियम बस इतना है कि तीन में से दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए, जिससे एजुकेशन में देश की अपनी भाषाओं को मजबूत किया जा सके.

किताबों और शिक्षकों की कमी पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?

इस नीति के लागू होने के बाद स्कूलों और पेरेंट्स को सबसे बड़ी चिंता किताबों और योग्य शिक्षकों को लेकर थी. यह मामला कोर्ट तक भी पहुंच गया था. इस पर शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश की 22 भारतीय भाषाओं में टेक्स्टबुक्स समय पर बनकर तैयार हो जाएंगी. उन्होंने कहा कि स्कूलों में पर्याप्त टीचर्स और जरूरी रिसोर्सेस की व्यवस्था करना सीबीएसई की जिम्मेदारी है. इसलिए किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें



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