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भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों में आते हैं… ऐसा क्यों?...


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भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों में आते हैं… ऐसा क्यों? पता है आपको!

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देशभर में 7000 से अधिक रेलवे स्‍टेशन हैं. तमाम स्‍टेशन कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. इन्‍हीं में से नवापुर और भवानी मंडी स्टेशन हैं, जो दो राज्यों की सीमा पर हैं. इनका आधा हिस्सा एक राज्य में है और आधा दूसरे में है. यानी यात्री कुछ कदम चलने पर दूसरे राज्‍य पर पहुंच जाते हैं. यह स्थिति राज्यों के पुनर्गठन और नई सीमाओं की वजह से बनी है.

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रेलवे स्‍टेशन पहले से बने थे और राज्‍यों के पुनर्गठन दो राज्‍यों की सीमाओं पर बंट गए.

नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे के देशभर में 7000 से अधिक रेलवे स्‍टेशन हैं. तमाम स्‍टेशन ऐसे हैं, जो कोई न कोई खासियत समेटे हुए हैं. इसी तरह कुछ स्‍टेशन ऐसे हैं, जो दो राज्‍यों की सीमा में पड़ते हैं. इन स्टेशनों की सबसे खास बात यह है कि प्लेटफॉर्म पर कुछ कदम चलते ही यात्री एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंच जाते हैं. इस तरह के स्‍टेशन राज्‍यों के पुनर्गठन के बाद बने बॉर्डर की वजह से बने हैं.

ऐसे स्टेशनों में सबसे चर्चित नाम नवापुर रेलवे स्टेशन का है, जो महाराष्ट्र और गुजरात की बॉर्डर पर स्थित है. इसका एक हिस्सा महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में आता है और दूसरा हिस्सा गुजरात के तापी जिले में पड़ता है. इसी वजह से यह स्टेशन लंबे समय से अपनी अनोखी पहचान बनाए हुए है. यहां कई वर्षों तक एक ऐसी बेंच भी रही, जिसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र और आधा गुजरात में था. यह बेंच यात्रियों के लिए खास बनी रहती थी.
इसी तरह भवानी मंडी रेलवे स्टेशन भी दो राज्यों में है. यह स्टेशन राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है. स्टेशन का नाम राजस्थान के भवानी मंडी शहर के नाम पर रखा गया, लेकिन इसका कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश की सीमा में आता है. इस वजह से यह स्टेशन भी दोनों राज्यों की पहचान लिए हुए है.

क्‍या है इसकी वजह

इन स्टेशनों के दो राज्यों में आने के पीछे राज्‍यों का पुनर्गठन है. जब इन स्‍टेशनों का निर्माण हुआ, उस समय वर्तमान राज्यों के बॉर्डर नहीं थीं. बाद में राज्यों के पुनर्गठन और नई प्रशासनिक सीमाएं तय की गयीं. कई स्थानों पर सीमाएं पहले से बनी रेलवे लाइन या स्टेशन के बीच से गुजरने लगीं. इससे कुछ स्टेशन दो राज्यों की सीमा में आ गए.

क्‍यों हटाया नहीं गया

ऐसी स्थिति बनने के बाद रेलवे के सामने स्टेशन को दूसरी जगह ट्रांसफर करने का विकल्प था, लेकिन यह काम बेहद महंगा माना गया. रेलवे स्टेशन, ट्रैक और उससे जुड़े ढांचे को हटाकर नई जगह बनाना आसान नहीं था. इसलिए इन स्टेशनों को उसी स्थान पर रहने दिया गया. कोई बदलाव नहीं किया गया.

मिसाल बने हैं ये स्‍टेशन

आज नवापुर और भवानी मंडी जैसे स्टेशन केवल रेल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास और प्रशासनिक बदलावों की अनोखी मिसाल भी माने जाते हैं. ये स्टेशन बताते हैं कि समय के साथ राज्य बदल सकते हैं, लेकिन पहले से तैयार बुनियादी ढांचे को हर बार बदलना संभव नहीं होता. यही वजह है कि आज भी भारत में कुछ रेलवे स्टेशन दो राज्यों की सीमा पर हैं.

About the Author

Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें



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