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फा. आनंद डेविड खलखो का धर्माध्यक्षीय अभिषेक 8 अगस्त को, पोप लियो...



कैथोलिक कलीसिया के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो 14वें ने रांची महाधर्मप्रांत के लिए फा. आनंद डेविड खलखो को नया सहायक धर्माध्यक्ष (ऑक्सिलरी बिशप) नियुक्त किया है। इसकी आधिकारिक घोषणा रांची स्थित संत मरिया महागिरजाघर में आर्चबिशप विंसेंट आईंद ने की है। नियुक्ति के बाद अब फादर आनंद डेविड खलखो का धर्माध्यक्षीय अभिषेक कर उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अभिषेक समारोह आठ अगस्त को सुबह नौ बजे पुरुलिया रोड स्थित लोयला मैदान में आयोजित होगा। आर्चबिशप विंसेंट आईंद उन्हें अभिषेक प्रदान कर कलीसिया की जिम्मेवारी सौंपेंगे। इसमें देशभर के बिशप, पुरोहित, धर्मबहनें और विश्वासी शामिल होंगे। फा. आनंद डेविड खलखो ने कहा कि वेटिकन (रोम) से नियुक्ति के बाद तीन महीने के भीतर धर्माध्यक्षीय अभिषेक की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। उन्होंने कहा कि सहायक बिशप के रुप में वे ग्रामीण क्षेत्रों में कलीसियाई गतिविधियों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक कल्याण के कार्यों को करने में आर्चबिशप को सहयोग करेंगे। पूरे झारखंड में अंडमान-निकोबार को मिलाकर कैथोलिक कलीसिया के कुल नौ डायसिस हैं। इनमें रांची एकमात्र आर्चडायसिस है, जिसका नेतृत्व आर्चबिशप करते हैं। फा. आनंद की नियुक्ति इसी रांची आर्चडायसिस के सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में की गई है। आठ अन्य डायसिस में दुमका, डाल्टनगंज, गुमला, हजारीबाग, जमशेदपुर, खूंटी, सिमडेगा और पोर्ट ब्लेयर आते हैं। सहायक धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषेक के दौरान फा. आनंद डेविड खलखो विशेष धर्माध्यक्षीय पोशाक धारण करेंगे, जिसे पोप लियो 14वें की ओर से रोम से भेजा जाएगा। इसके साथ बिशप पद की पारंपरिक निशानियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें सिर पर पहनने वाली विशेष ऊंची और नुकीली टोपी ‘माइटर’, भले चरवाहे का प्रतीक ‘क्रोजर’ (धर्मदंड) तथा धर्माध्यक्षीय अंगूठी शामिल है। ये सभी वस्तुएं कैथोलिक कलीसिया में बिशप के आध्यात्मिक दायित्व, नेतृत्व और सेवा का प्रतीक मानी जाती हैं। सहायक धर्माध्यक्ष बनने के बाद फा. आनंद डेविड खलखो अभिषेक के बाद उनका आधिकारिक निवास बिशप हाउस होगा, जबकि सेंट मेरी कैथेड्रल के लिए नए पल्ली-पुरोहित की नियुक्ति की जाएगी। नवनियुक्त सहायक धर्माध्यक्ष फा. आनंद डेविड खलखो ने बताया कि फिलहाल भारत में पोप लियो 14वें के राजदूत की नियुक्ति नहीं हुई है। यदि अभिषेक समारोह से पहले नियुक्ति हो जाती है, तो वे समारोह में शामिल होंगे। हालांकि धर्माध्यक्षीय अभिषेक की धर्मविधि आर्चबिशप के हाथों ही संपन्न होगी, जबकि राजदूत पोप का संदेश पढ़ेंगे।



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