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NCERT: बदल गई क्लास 9 की सोशल साइंस, अब गाइड नहीं, असली...


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NCERT Class 9 New Social Science Textbook 2026: एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब में कई बदलाव किए हैं. अब स्टूडेंट्स 1975-77 के आपातकाल और चुनाव आयोग के SIR अभियान के बारे में पढ़ेंगे. एनसीईआरटी ने इकोनॉमिक्स विषय का सिलेबस भी बदला है.

बदल गई क्लास 9 की सोशल साइंस, अब पढ़ेंगे असली इतिहास और प्रैक्टिकल इकॉनमीZoom

NCERT Class 9 Social Science Textbook 2026: एनसीईआरटी ने 9वीं की किताबों में बदलाव किया है

नई दिल्ली (NCERT Class 9 New Social Science Textbook 2026). एनसीईआरटी ने साल 2026-27 के सेशन से 9वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में कई बड़े बदलाव किए हैं. इस नई किताब का नाम होगा- ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 1’. यह सिर्फ किताब का नाम या सिलेबस बदलने जैसी छोटी बात नहीं है. अब बच्चों को देश, लोकतंत्र, सरकारी संस्थाओं और इकोनॉमी (अर्थव्यवस्था) को नए और प्रैक्टिकल नजरिए से समझाने की तैयारी है.

एनसीईआरटी की इस नई किताब से अब 9वीं के स्टूडेंट्स भी देश की राजनीति और इतिहास के वो बड़े सेगमेंट्स जानेंगे, जो पहले सिर्फ बड़ी क्लास के बच्चों को ही पढ़ाए जाते थे. इसमें चुनाव आयोग के नए अभियानों की भी बात होगी. साथ ही देश का सबसे चर्चित दौर यानी ‘आपातकाल’ भी नए कोर्स में शामिल किया गया है. इसका मकसद यही है कि बच्चे आज के भारत को सिर्फ रटें नहीं, बल्कि बहुत गहराई से और आसानी से समझ सकें.

किताबों में शामिल चुनाव आयोग का ‘SIR’ फॉर्मूला

बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए एक खास अभियान चलाया था. इसे ‘विशेष गहन संशोधन’ या ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) कहा गया. इस अभियान को कक्षा 9 के चुनाव वाले चैप्टर में शामिल कर लिया गया है. इसमें चुनाव आयोग को स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था बताते हुए इसके काम समझाए गए हैं. ‘SIR’ अभियान सुनिश्चित करता है कि वोटर लिस्ट में किसी भी योग्य नागरिक का नाम न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम शामिल न हो.

9वीं के छात्र पहली बार पढ़ेंगे 1975-77 का ‘आपातकाल’

नए सिलेबस का सबसे बड़ा बदलाव है देश में लगे 1975-77 के ‘आपातकाल’ की एंट्री. इससे पहले इमरजेंसी के बारे में केवल कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की ऑप्शनल किताब में पढ़ाया जाता था. लेकिन अब इसे सेकंडरी लेवल पर भी अनिवार्य कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब हर स्टूडेंट को भारतीय लोकतंत्र के उस दौर के बारे में जानना होगा, जिसने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी. इससे बच्चों में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर बेहतर समझ डेवलप होगी.

अब रटने वाली नहीं, ‘कमी और चॉइस’ वाली इकोनॉमिक्स

तीसरा बदलाव अर्थशास्त्र (Economics) में किया गया है. अब तक बच्चे अर्थशास्त्र को बहुत किताबी और उबाऊ तरीके से पढ़ते थे, लेकिन अब इसे ‘कमी’ (Scarcity) और ‘विकल्पों के चुनाव’ (Choices) के इर्द-गिर्द बुना गया है. इसमें समझाया गया है कि जब रिसोर्सेस सीमित होते हैं तो कोई आम इंसान, बड़ी कंपनियां और सरकारें फैसला कैसे लेती हैं. मार्केट कैसे काम करता है और उसमें सरकार की क्या भूमिका होती है, यह भी बहुत प्रैक्टिकल भाषा में समझाया गया है. यह बदलाव बच्चों को रट्टामार पढ़ाई से दूर ले जाकर उनके सोचने-समझने का दायरा बढ़ाएगा.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें



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