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तेजस, राफेल, एम्का… सब पर ग्रहण, चौतरफा परेशानी में घिरी IAF, क्या...


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Tejas MK1A Rafale AMCA IAF Facing Fighter Jet Crisis: इंडियन एयरफोर्स के पास फाइटर जेट्स की भारी कमी है. तेजस मार्क-1ए और मार्क-2 प्रोजेक्ट इंजन देरी से अटके हुए हैं. राफेल डील भी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है. पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट एम्का प्रोजेक्ट भी अभी शुरुआती दौर में है. ऐसे में 2035 तक स्थिति चिंताजनक दिख रही है.

तेजस, राफेल, AMCA... सब पर ग्रहण, चौतरफा परेशानी में घिरी IAF, सभी प्लान फेल?Zoom

भारतीय एयरफोर्स के राफेल और तेजस फाइटर जेट. फोटो- पीटीआई

Tejas MK1A Rafale AMCA IAF Facing Fighter Jet Crisis: इंडियन एयरफोर्स इस वक्त लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही है. यह बात किसी से छिपी नहीं है. लेकिन, असल चिंता यह नहीं है कि एयरफोर्स के पास जरूरत से काफी कम फाइटर जेट्स हैं, बल्कि चिंता की बात यह है कि आने वाले करीब 10 सालों में ऐसी कोई स्थिति नहीं दिख रही जिससे कहा जा सके कि एयरफोर्स के पास 2035-40 तक पर्याप्त संख्या में फाइटर जेट्स उपलब्ध हो जाएंगे. फाइटर जेट्स खरीदने के एयरफोर्स के हर एक प्लान में कहीं न कहीं बड़ा लोचा दिख रहा है. इस कारण आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है.

दरअसल, फाइटर जेट्स खरीदना कोई गाड़ी-बंगला खरीदने जैसा काम नहीं है. कुछ महीने पहले एयरफोर्स चीफ एपी सिंह ने खुद कहा था कि फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या फ्रीज नहीं है जो आप बाजार गए और खरीद कर लेते आए. फाइटर जेट्स बनाना, बेचना और खरीदना बेहद जटिल काम हैं. दुनिया के गिने-चुने मुल्क फाइटर जेट्स बनाने की काबिलियत रखते हैं. उनके साथ डील में तमाम तरह के किंतु-परंतु जुड़े होते हैं. इन्हीं सभी वजह से भारत के सामने मुश्किल घड़ी आ खड़ी हुई है. इस मुश्किल वक्त के लिए सरकार या एयरफोर्स या देश की नौकरशाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार भी नहीं ठहराया जा सकता है. बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और समय ऐसी चीज है जो हर किसी की पहुंच से बाहर की चीज है.

केवल 30 स्क्वाड्रन पर अटकी एयरफोर्स

भारतीय एयरफोर्स के पास इस वक्त फाइटर जेट्स के करीब 30 स्क्वाड्रन हैं. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. जबकि चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से घिरे होने की वजह से कम से कम 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है. इतना ही नहीं इस 30 स्क्वाड्रन में कई मिग-29 और जैगुआर जैसे फाइटर जेट्स के स्क्वाड्रन भी हैं. ये भी अगले कुछ ही सालों में रिटायर होंगे. यानी स्क्वाड्रन संख्या लगातार कम हो रही है. अब आते हैं सिक्के के दूसरे पहलू पर. आप सोच रहे होंगे कि अगर स्क्वाड्रन संख्या लगातार गिर रहे हैं तो भारत ने इसकी तैयारी समय रहते क्यों नहीं की. आप इस मामले में कुछ हद तक सही हैं लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है. भारत पूरी तरह से हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा था. इस बात को समझने के लिए हमें थोड़ा इतिहास खंगालना होगा.

स्वदेसी जेट पर जोर

सबसे पहली बात यह कि भारत की लंबे समय से कोशिश रही है कि वह अपना स्वदेशी फाइटर जेट बना ले जिससे कि इसके लिए विदेशों पर निर्भर न रहना पड़े. इसमें भारत को काफी हद तक सफलता भी मिल चुकी है. भारत ने चौथी पीढ़ी के तेजस विमान डेवलप कर लिए हैं. 40 तेजस एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हैं. उसके बाद भारत ने और एडवांस तेजस मार्क-1ए डेवलप किया. ये एक शानदार हल्के लड़ाकू विमान हैं जिसमें बेहद एडवांस रडार सिस्टम और अन्य चीजें हैं. ये चीनी चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान जे-10 सी से कई मामलों में बेहतर हैं. पाकिस्तान की सेना के पास बड़ी संख्या में जे-10सी विमान हैं. अब वह इसे बांग्लादेश को भी बेचने जा रहा है.

ऐसे में एयरफोर्स ने सरकारी कंपनी एचएएल को काफी पहले 180 तेजस मार्क-1ए के ऑर्डर दे दिए. इस डील के मुताबिक एयरफोर्स को पहला तेजस मार्क-1ए जेट फरवरी 2024 में मिल जाना था. लेकिन, इस डिलिवरी में अब तक करीब ढाई साल की देरी हो चुकी है. एयरफोर्स को कोई विमान नहीं मिला है. और इस डिलिवरी में सबसे बड़ा झोल अमेरिका है. दरअसल, भारत ने फाइटर जेट तो बना लिया लेकिन उसके पास इस जेट का इंजन नहीं है. उसने इसके लिए अमेरिकी जनरल मोटर्स यानी जीई कंपनी से उसके एफ404 इंजन की डील की थी. लेकिन, यह जीई कंपनी समय से इंजन की डिलिवरी नहीं कर पा रही है और इस कारण भारत का पूरा प्लान पटरी से उतरता दिख रहा है. अभी तक जीई ने केवल 6-7 इंजन की डिलिवरी की है. दूसरी तरफ चीन और पाकिस्तान अपने एयरफोर्स को तेजी से मॉर्डन बनाने में जुटे हैं. चीन की एयरफोर्स कब का पांचवीं पीढ़ी का जेट उड़ा रही है. वह अब छठी पीढ़ी के जेट पर काम कर रहा है.

स्वदेशी तेजस बेहतरीन हल्के लड़ाकू विमान हैं. फोटो- पीटीआई

तेजस मार्क-2 की कहानी

इस कहानी की दूसरी कड़ी तेजस मार्क-2 है. यह तेजस श्रेणी का ही और एडवांस जेट है. इसको 4.5 पीढ़ी का हल्का जेट कहा जाता है. यह कई मामलों में 4.5+ पीढ़ी के दुनिया के बेहतरीन जेट राफेल को टक्कर देता है. लेकिन, इस प्रोजेक्ट में भी दो स्तरों पर अड़चन आ गई है. योजना के मुताबिक अब तक इस जेट का टेस्ट उड़ान शुरू हो जाना था लेकिन, इसकी डिजाइन में कुछ कमी की वजह से इसमें काफी कुछ बदलाव किया जा रहा है. और एचएएल की रिपोर्ट के मुताबिक अब इस जेट में बदलाव में कम से कम और 10 महीने का समय लगेगा. इसके साथ ही इस जेट में भी अमेरिकी जेई कंपनी का एफ414 इंजन लगाया जाएगा. इसके लिए जीई कंपनी से बातचीत चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक जई ने अब इस इंजन की प्राइस करीब-करीब तीन गुना बढ़ा दी है. उसने एक इंजन के लिए करीब 200 करोड़ की डिमांड रखी है. इस कारण इस पूरे प्रोजेक्ट पर संकट के बादल छा गए हैं. अगर इस मोड़ पर तेजस मार्क-2 के लिए इंजन में बदलाव किया जाता है तो हर एक चीज बदलनी पड़ेगी और यह प्रोजेक्ट और 4-5 साल पीछे चला जाएगा. अगर इस जेट की टेस्ट उड़ान समय पर हो जाती और जीई के साथ इंजन डील हो भी जाती तो 2029-30 से इस जेट की डिलिवरी शुरू हो सकती थी. लेकिन, अब सब कुछ अधर में लटकता दिख रहा है. मौजूदा स्थिति में 2030 तक ऐसा कुछ होते नहीं दिख रहा है.

एम्का प्रोजेक्ट

अब आते हैं एम्का प्रोजेक्ट को लेकर. भारत 2035 तक अपना स्वदेसी 5+ जेन का फाइटर जेट बना रहा है. लेकिन, इसमें भी सबसे बड़ा लोचा इंजन का ही आने वाला है. इस पांचवीं पीढ़ी के जेट में शुरुआती तौर पर एफ414 इंजन लगाया जाना है. लेकिन, इस इंजन को लेकर ही सारा बवाल मचा हुआ है. साथ ही भारत सरकार ने अभी तक इस पांचवीं पीढ़ी के जेट के प्रोटोटाइप बनाने के लिए कंसोर्टियन तक को फाइलन नहीं किया है. कंसोर्टियम को तीन साल में प्रोटोटाइप बनाने हैं. कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट मौजूदा वक्त में काफी शुरुआती स्तर पर है. ऐसे में इसको लेकर बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती है. वैसे भी अगर सब कुछ नियत समय के साथ चलता रहे तो भी इसकी डिलिवरी 2035 के बाद ही शुरू होगी.

एयरफोर्स के पास फिलहाल राफेल के दो स्क्वाड्रन हैं. फोटो- पीटीआई

राफेल आखिर उम्मीद

अब भारत सरकार के पास ले देकर त्वरित विकल्प के तौर पर राफेल बचता है. फ्रांस से 114 राफेल जेट खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन, अभी तक डील फाइनल नहीं हुई है. अगर इस साल यह डील हो जाती है तो फ्रांस से 20 राफेल फ्लाअवे कंडीशन में आएंगे जबकि 94 जेट का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. ऐसा नहीं है कि फ्लाअवे वाले जेट डील साइन होने के साथ मिल जाएंगे. इसकी डिलिवरी भी कम से कम तीन साल लगेंगे. दूसरी तरफ भारत में लगने वाले प्लांट की क्षमता मात्र 12 जेट प्रतिवर्ष की होगी और सब कुछ ठीक रहा तो इससे उत्पादन 2030 के आसपास ही शुरू होगी. यानी पूरे 94 जेट आने में कम से कम आठ साल का वक्त लगेगा. यानी 2038-40 तक सभी राफेल डिलिवर हो पाएंगे. तक तक गंगा में काफी बह चुका होगा. चीन और अमेरिका छठी पीढ़ी के जेट उड़ा रहे होंगे. लेकिन, हम राफेल और एम्का पर ही अटके होंगे.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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