Last Updated:
ममता बनर्जी समर्थक टीएमसी गुट ने बागी धड़े के खिलाफ कोलकाता व बिधाननगर के चार थानों में शिकायत दी है. इन पर आरोप है कि इन्होंने अनधिकृत रूप से टीएमसी नाम व चुनाव चिह्न के इस्तेमाल किया.
टीएमसी में ममता बनर्जी गुट ने विरोधी गुट के खिलाफ चार केस दर्ज करवाए हैं.
TMC Conflict: पश्चिम बंगाल की सत्ता से बार होने के बाद तृणमूल कांग्रेस में मची अंदरूनी कलह अब खुलकर पुलिस और कानूनी लड़ाई तक पहुंच गई है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल लेकिन अल्पमत गुट ने पार्टी के बागी और बहुमत वाले धड़े के खिलाफ कोलकाता और आसपास के चार अलग-अलग पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि बागी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का अनधिकृत इस्तेमाल कर रहा है तथा संगठनात्मक नियमों की अनदेखी करते हुए नई नेतृत्व व्यवस्था की घोषणा कर रहा है.
जानकारी के मुताबिक शिकायतें कोलकाता पुलिस के कालीघाट और प्रगति मैदान थाने के अलावा बिधाननगर सिटी पुलिस के न्यू टाउन थाना और बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई हैं. अंतिम शिकायत साइबर पुलिस स्टेशन में दी गई, जिसमें सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर पार्टी के नाम और प्रतीक के इस्तेमाल का भी मुद्दा उठाया गया है. ममता बनर्जी के प्रति निष्ठा रखने वाले गुट का आरोप है कि पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी धड़ा टीएमसी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न का उपयोग कर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है.
पार्टी अध्यक्ष के पद पर अब भी ममता बनर्जी
इतना ही नहीं, इस गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया, जबकि पार्टी अध्यक्ष के पद पर अब भी ममता बनर्जी ही हैं. ममता समर्थक गुट का कहना है कि वर्ष 2022 में टीएमसी का संगठनात्मक सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें पार्टी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से ममता बनर्जी को आजीवन पार्टी अध्यक्ष बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया था. पार्टी के संविधान के अनुसार केवल वे सदस्य प्रतिनिधि बन सकते हैं, जो कम से कम पांच वर्षों से संगठन से जुड़े हों. इसी सम्मेलन में ममता बनर्जी को अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला लिया गया था.
गुट के नेताओं का कहना है कि संगठनात्मक सम्मेलन हर पांच साल में आयोजित किया जाता है. इस हिसाब से अगला सम्मेलन वर्ष 2027 में होना है. यदि इससे पहले कोई विशेष परिस्थिति उत्पन्न होती है तो केवल पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को ही विशेष अधिवेशन बुलाने का अधिकार है. ऐसे में बागी गुट द्वारा किसी भी संगठनात्मक प्रक्रिया का पालन किए बिना अरूप रॉय को अध्यक्ष घोषित करना पूरी तरह अवैध और पार्टी संविधान के खिलाफ है. ममता समर्थक नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बागी गुट अपनी सुविधानुसार पार्टी के नाम, झंडे और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है.
इसी कारण चार अलग-अलग पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई गई है, ताकि इस कथित अनधिकृत गतिविधि पर रोक लगाई जा सके. हालांकि, बागी गुट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष भी सामने रखा है. उनके अनुसार, पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर मामला पहले ही भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के समक्ष पहुंच चुका है. इसलिए अब अंतिम फैसला आयोग ही करेगा और वही तय करेगा कि पार्टी का वास्तविक अधिकार किस गुट के पास है.
About the Author
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें