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1 एकड़ से 1 लाख कमाई…बोकारो के किसान ने यूट्यूब से सीखी...


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1 एकड़ से 1 लाख कमाई..बोकारो के किसान ने यूट्यूब से सीखी खेती, अब छाप रहे दौलत

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Bokaro Farmer Earning Well With Nenua: बोकारो के परसाबेड़ा गांव के किसान शरद महतो ने यूट्यूब से सीखकर मचान विधि से नेनुआ की खेती की. उन्होंने एक एकड़ में नेनुआ उगाकर करीब 1.35 लाख शुद्ध मुनाफा कमाया है. वे दूसरे किसानों को भी यही तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं.

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बोकारो. पारंपरिक खेती छोड़कर स्मार्ट तकनीक अपनाने वाले किसान आज बेहतर आमदनी कमाकर नई कहानी लिख रहे हैं. ऐसे ही बोकारो जिले के चास प्रखंड के परसाबेड़ा गांव के किसान शरद महतो भी एक एकड़ जमीन में मचान विधि से नेनुआ की खेती कर न केवल अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

शरद महतो बताते हैं कि उनका परिवार सालों से खेती करता आ रहा है. पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर थे, लेकिन खेती से सीमित आमदनी होने के कारण उन्हें नए विकल्प खोजने पड़े. फिर यूट्यूब पर खेती से जुड़े वीडियो और दूसरे सफल किसानों से प्रेरित होकर उन्होंने सब्जी उत्पादन की ओर कदम बढ़ाया और आज की तारीख में मोटी कमाई कर रहे हैं.

पहली तुड़ाई के बाद नियमित फल
किसान शरद के अनुसार, उन्होंने अप्रैल महीने में नेनुआ की बुवाई की थी और यह फसल लगभग 50 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है. इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली तुड़ाई के बाद करीब दो महीने तक लगातार फल मिलते रहते हैं, जिससे किसानों को नियमित आमदनी मिलती है.

आगे शरद महतो बताते हैं कि एक एकड़ में नेनुआ की खेती पर करीब 15 हजार रुपये की लागत आई है और पूरे सीजन में 60 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है. वे अपनी उपज बोकारो के सेक्टर-5 सब्जी मंडी में बेचते हैं, जहां वर्तमान में नेनुआ का थोक भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो मिल रहा है.

हो सकती है इतनी आमदनी
ऐसे में औसतन 60 क्विंटल उत्पादन और 25 रुपये प्रति किलो के भाव से किसानों को करीब 1.50 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है. इसमें लागत निकालने के बाद लगभग 1.35 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा संभव है. यही वजह है कि कम लागत और बेहतर मुनाफे के कारण ज्यादातर किसान नैनुआ की खेती करते हैं.

आखिर में शरद महतो ने किसानों को सलाह दी है कि नेनुआ की अच्छी पैदावार के लिए समय पर सिंचाई, खेत की नियमित निगरानी और कीट-रोग प्रबंधन बेहद जरूरी है. अगर कीटों का समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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