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भास्कर न्यूज | चतरा जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए धान के उठाव को लेकर एक बार फिर सुस्ती सामने आई है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में खरीदे गए धान का उठाव 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने में अब केवल दो दिन शेष हैं और अभी भी 4,160 क्विंटल धान विभिन्न पैक्सों के गोदामों में पड़ा हुआ है। इससे पैक्स प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। ई-उपार्जन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 1,67,044 क्विंटल धान की खरीद हुई थी। इसमें से 1,62,884 क्विंटल का उठाव हो चुका है, जबकि 4,160 क्विंटल धान अब भी गोदामों में पड़ा है। यदि पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई देती है। वर्ष 2024-25 में 154 क्विंटल, 2023-24 में 4187 क्विंटल, 2022-23 में 9645 क्विंटल तथा 2021-22 में 3,844 क्विंटल धान का उठाव अब तक नहीं हो सका। इस प्रकार पांच वर्षों में कुल 21,990 क्विंटल धान पैक्स गोदामों में लंबित है। धान का समय पर उठाव नहीं होने से पैक्सों के गोदामों में भंडारण क्षमता प्रभावित होती है। आगामी खरीफ विपणन सीजन से पहले यदि पुराने स्टॉक का निष्पादन नहीं हुआ तो नए धान के भंडारण में परेशानी आ सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक गोदामों में धान पड़े रहने से गुणवत्ता प्रभावित होने और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ता है। यह आंकड़े बताते हैं कि धान खरीद के बाद समय पर उठाव सुनिश्चित करना अब भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है। यदि इस दिशा में तेजी नहीं लाई गई, तो आगामी खरीद सत्र में भंडारण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय है। 2025-26 4,160 2024-25 154 2023-24 4187 2022-23 9645 2021-22 3,844 कुल 21,990 क्विंटल। ^चालू वित्तीय वर्ष में बचे शेष धान का उठाव जल्द ही कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्षों में धान जमा नहीं करने वाले पैक्स अध्यक्षों के विरुद्ध थाना में गबन का मामला दर्ज किया गया है।^ -लोकनाथ महतो , जिला सहकारिता पदाधिकारी चतरा । जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा के भीतर शेष धान का उठाव पूरा करने की है। यदि 30 जून तक लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया तो पैक्सों को प्रशासनिक और वित्तीय दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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