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हूल दिवस संघर्ष, स्वाभिमान व सामाजिक न्याय का प्रतीक : मोजम्मिल अंसारी



भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिला कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के जिला अध्यक्ष मोजम्मिल अंसारी ने हूल दिवस के अवसर पर वीर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव सहित सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 30 जून झारखंड के इतिहास में संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक दिवस है। वर्ष 1855 में इसी दिन अमर वीर सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू और भैरव मुर्मू के नेतृत्व में अंग्रेजी शासन, महाजनी शोषण और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ ऐतिहासिक हूल आंदोलन का शंखनाद हुआ था। उन्होंने कहा कि हूल आंदोलन केवल आदिवासी समाज का विद्रोह नहीं था, बल्कि अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध जन-जन की आवाज था। इस आंदोलन ने पूरे समाज को अपने अधिकारों, सम्मान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। वीर शहीदों का त्याग और बलिदान आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। मोज़म्मिल अंसारी ने कहा कि हूल दिवस हमें केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह अपने अधिकारों, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संदेश भी देता है। हूल आंदोलन का मूल उद्देश्य जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ शोषणमुक्त समाज की स्थापना था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति, विविध परंपराओं और आपसी भाईचारे में निहित है। हूल दिवस हमें एकता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक संघर्ष की शक्ति का एहसास कराता है।



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