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Palamu Narmada Shivling Demand Increases: सावन के महीने में मेदिनीनगर के बाजार में नर्मदेश्वर शिवलिंग की मांग बढ़ गई है. ये 600 रुपये से 18 हजार रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं. इन शिवलिंग की विशेष धार्मिक मान्यता होती है.
पलामू. सावन का पावन महीना भगवान शिव का महीना माना जाता है. इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है. इसी के साथ मेदिनीनगर के बाजार में शिवलिंग की मांग भी बढ़ गई है. खासकर नर्मदेश्वर शिवलिंग श्रद्धालुओं की पहली पसंद बने हुए हैं. मेदिनीनगर के बिस्फुटा से आगे संचालित श्री राम मूर्ति कला केंद्र में सावन को लेकर अलग-अलग आकार और पत्थरों के शिवलिंग उपलब्ध हैं.
दरअसल, पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के बिस्फुटा के निकट स्थित श्री राम मूर्ति कला केंद्र में सभी तरह की मूर्तियां और शिवलिंग बनाए जाते हैं. यहां 200 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक के शिवलिंग मिल रहे हैं. हालांकि, इन दिनों सबसे अधिक मांग नर्मदेश्वर शिवलिंग की है, जिनकी कीमत आकार के अनुसार 600 रुपये से लेकर 18 हजार रुपये तक है.
20 साल पहले की थी शुरुआत
संचालक संजीत कुमार चौधरी ने लोकल18 को बताया कि करीब 20 वर्ष पहले उन्होंने पलामू में मूर्ति कला केंद्र की शुरुआत की थी. वर्तमान में मेदिनीनगर में केंद्र का संचालन किया जा रहा है. सावन के दौरान शिवलिंग की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि नर्मदेश्वर शिवलिंग की विशेष धार्मिक मान्यता होने के कारण लोग इसे घर में स्थापित करने के लिए भी खरीदते हैं. मान्यता है कि नर्मदा नदी से मिले प्राकृतिक शिवलिंग स्वयं सिद्ध होते हैं और इनकी स्थापना के लिए अलग से प्राण-प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं होती.
खूब डिमांड में हैं ये शिवलिंग
उन्होंने बताया कि नर्मदेश्वर शिवलिंग प्राकृतिक रूप से अंडाकार आकृति के होते हैं. यहां तीन इंच से लेकर करीब दो फीट तक के नर्मदेश्वर शिवलिंग उपलब्ध हैं. इनकी कीमत 600 रुपये से शुरू होकर आकार और गुणवत्ता के अनुसार 18 हजार रुपये तक पहुंचती है. सावन में बड़े आकार के नर्मदेश्वर शिवलिंग की भी विशेष मांग है. श्रद्धालु इन्हें पूजा के साथ-साथ घर और मंदिर में स्थापित करने के लिए खरीद रहे हैं.
इस वजह से है विशेष आस्था
आगे बताया कि केंद्र में नर्मदेश्वर के अलावा कसौटी पत्थर के शिवलिंग भी उपलब्ध हैं. कसौटी पत्थर को मजबूत और टिकाऊ पत्थर माना जाता है. इन शिवलिंगों पर आकर्षक नक्काशी कराई जाती है, जिसके लिए बनारस और गया के कारीगरों की मदद ली जाती है. अलग-अलग आकार, पत्थर और नक्काशी के अनुसार शिवलिंग की कीमत तय होती है. उन्होंने बताया कि सावन में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था के कारण शिवलिंग की बिक्री में भी तेजी आई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार नर्मदा नदी के कंकर-कंकर में भगवान शिव का वास माना जाता है, यही वजह है कि नर्मदेश्वर शिवलिंग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिलती है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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