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मानसून के कारण बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है. एनटीसीए के निर्देश पर इस दौरान जंगल सफारी और इको-टूरिज्म गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी. अब 1 अक्टूबर से दोबारा जंगल सफारी शुरू होगी. हालांकि पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस और कैंटीन खुले रहेंगे.
पलामूः मानसून के आते हीं प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बेतला नेशनल पार्क को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. बता दें कि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के निर्देशानुसार इस अवधि में जंगल सफारी के लिए व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश तथा पार्क के भीतर होने वाली सभी इको-टूरिज्म गतिविधियों पर रोक रहेगी.अब पर्यटक 1 अक्टूबर से दोबारा बेतला के घने जंगलों में वन्यजीवों का दीदार और जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे.
बता दें कि मानसून का मौसम वन्यजीवों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रजनन (ब्रीडिंग) काल माना जाता है. इस दौरान जानवरों को शांत और प्राकृतिक वातावरण की आवश्यकता होती है. पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही से उनकी प्रजनन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे वन्यजीवों की संख्या पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है. यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि में राष्ट्रीय उद्यानों को अस्थायी रूप से बंद रखा जाता है, ताकि वन्यजीव बिना किसी व्यवधान के अपने प्राकृतिक व्यवहार को जारी रख सकें. ऐसे में जंगल सफारी पर रोक रहती है.
बारिश में बढ़ जाता है हादसों का खतरा
वन विभाग के अनुसार मानसून के दौरान जंगल के अधिकांश कच्चे रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं. ऐसे में सफारी वाहन फंसने की संभावना बढ़ जाती है. यदि वाहन जंगल के भीतर फंस जाए तो हाथियों, बाघों या अन्य हिंसक वन्यजीवों के हमले का खतरा भी बढ़ सकता है. अचानक मौसम खराब होने या तेज बारिश की स्थिति में पर्यटकों की सुरक्षा भी चुनौती बन जाती है. इसी वजह से पार्क को तीन महीने के लिए पूरी तरह बंद रखा जाता है.
रेस्ट हाउस और कैंटीन रहेंगे चालू
हालांकि जंगल के भीतर प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी, लेकिन बेतला आने वाले पर्यटकों के लिए वन विभाग के रेस्ट हाउस, कैंटीन और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी. यहां पर्यटक ट्री हाउस में ठहर सकेंगे. इसके साथ आस पास के पर्यटन स्थल पर घूम सकते है. परिसर में ठहर सकेंगे और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे, लेकिन उन्हें जंगल सफारी या पार्क के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.
रखरखाव और हरियाली की तैयारी में जुटेगा वन विभाग
पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश जैना के अनुसार, मानसून के इन तीन महीनों में पार्क के अंदर सड़क मरम्मत, साफ-सफाई, रखरखाव और अन्य जरूरी कार्य कराए जाते हैं. बारिश के बाद जंगल पूरी तरह हरा-भरा हो जाता है और अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन को आकर्षक बनाने के लिए भी विशेष तैयारियां की जाती हैं.
इन जगह को कर सकते है एक्सप्लोर
इस दौरान पर्यटक पलामू किला, कमलदह झील, मिर्चैया फॉल, केचकी संगम समेत आस पास के क्षेत्र में भ्रमण कर सकते है. सबसे खासियत है कि पर्यटकों के लिए यहां घूमने के लिए ओपन हुड वाली गाड़ी मौजूद है. इसके अलावा सबसे खास तौर पर बरसात के मौसम में जंगल ट्रिप अगर करना चाहते है तो बेतला से मिर्चैया फॉल का रास्ता घूमने के लिए खास हो सकता है. जहां की जंगली जानवरों का दीदार हो सकता है. वहीं आपको मड हाउस और ट्री हाउस के पास मोर देखने को मिलता है.
हर साल पहुंचते हैं हजारों सैलानी
बता दें कि बेतला नेशनल पार्क झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और इसकी सीमा छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल से जुड़े क्षेत्रों के करीब है। अनुमान के अनुसार पिछले वर्ष से अब तक करीब 50 हजार पर्यटक बेतला पहुंच चुके हैं. वन विभाग का लक्ष्य इस वर्ष पर्यटन सीजन शुरू होने के बाद बेहतर सुविधाओं और नई व्यवस्थाओं के माध्यम से पर्यटकों की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी करना है. इसके लुटे लगातार नए नए चीजें पर्यटकों के लिए लाना है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.