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Ajmer Hindi News: पुष्कर सरोवर के घाट केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत विरासत भी हैं. सरोवर के 52 पवित्र घाटों का अपना-अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व माना जाता है. यहां श्रद्धालु पुण्य स्नान कर मोक्ष की कामना करते हैं, वहीं कई घाटों पर पिंडदान, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं. मान्यता है कि पुष्कर सरोवर में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने पहुंचते हैं. ब्रह्मा नगरी के रूप में प्रसिद्ध पुष्कर का यह सरोवर आज भी सनातन संस्कृति, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम माना जाता है, जो हर वर्ष लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
अजमेर: अजमेर जिले में स्थित तीर्थ नगरी पुष्कर की पहचान केवल भगवान ब्रह्मा के मंदिर से ही नहीं बल्कि पवित्र पुष्कर सरोवर और उसके चारों ओर बने 52 ऐतिहासिक घाटों से भी जुड़ी हुई है. पुष्कर के तीर्थ पुरोहित राहुल पाराशर बताते है कि पुष्कर वह स्थान है जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले सरोवर में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि ब्रह्मलोक के अलावा भगवान ब्रह्मा का ऐसा पवित्र स्थल केवल पुष्कर में ही है. यही कारण है कि वर्षभर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और सरोवर की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित करते हैं.
पुष्कर सरोवर के चारों ओर बने 52 घाटों का अपना-अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है. बद्री घाट, वराह घाट, झूलेलाल घाट, नरसिंह घाट, कुमाऊँ घाट, होल्कर घाट, इंद्र घाट, चंद्र घाट, जयपुर घाट, किशनगढ़ घाट, ग्वालियर घाट, जोधपुर घाट, सप्तऋषि घाट, कृष्ण घाट, वल्लभ घाट, गुर्जर घाट, कोटा घाट, करणी घाट, दधीचि घाट, सावित्री घाट, ब्रह्म घाट, राम घाट, जगन्नाथ घाट, गणगौर घाट और गौ घाट सहित सभी घाट किसी न किसी राजा, संत, संप्रदाय या धार्मिक परंपरा से जुड़े हुए हैं. श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार इन घाटों पर पूजा-पाठ और स्नान करते हैं.
विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना
पुरोहित आगे बताते है कि पुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं का उद्देश्य केवल स्नान तक सीमित नहीं रहता. यहां बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने, पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए भी पहुंचते हैं. विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपने परिजनों की अस्थियां लेकर पुष्कर आते हैं. वहीं विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सावित्री माता के दर्शन और पूजा करती हैं. विभिन्न राज्यों और समाजों के लोगों के लिए अलग-अलग घाट विशेष आस्था के केंद्र बने हुए हैं, जिससे पुष्कर देश की सांस्कृतिक विविधता का भी प्रतीक बन गया है.
आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है
पुष्कर सरोवर को सुहाग और मोक्ष का प्रमुख तीर्थ माना जाता है. अधिक मास सहित विशेष पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु पीतांबरी धारण कर सरोवर और भगवान ब्रह्मा का विशेष श्रृंगार करते हैं. धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक विरासत और सदियों पुरानी परंपराओं को समेटे पुष्कर सरोवर आज भी देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.
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