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‘मैं आसनसोल रेलवे में ग्रुप डी में जॉब करता था। जब यहां न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सीजीएल में नौकरी लगी तो रेलवे में रिजाइन कर यहां ज्वॉइन किया। 17 अगस्त को मुख्यमंत्री ने अचानक ऐसा निर्णय लिया कि हमलोग सड़क पर आ गए। मैं ही घर में बड़ा हूं तो परिवार की काफी जिम्मेदारी मुझ पर है। सरकार को ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए। मेरी शादी की भी बात चल रही थी, तब तक जॉब ही चली गई।’ यह कहना हजारीबाग के रहने वाले सीजीएल के सफल अभ्यर्थी सुरेंद्र कुमार की। वो सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। दरअसल, 17 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जैसे ही सीजीएल रद्द करने की घोषणा की, सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। वे प्रोजेक्ट भवन के पास ही धरने पर बैठ गए। मंगलवार को भी तेज बारिश के बीच दिनभर प्रोजेक्ट भवन के बाहर खड़े रहे। चयनित युवाओं ने कहा कि कुछ लोगों की गलती की सजा हम निर्दोषों को न दी जाए। शरीर गला कर परीक्षा पास की थी, नौकरी लगी थी। लेकिन अब कहीं के नहीं रहे। दैनिक भास्कर की टीम से कुछ युवाओं ने बात की और अपना दर्द बयां किया। हम सभी बीच मझदार में फंस गए: शिव प्रसाद मुर्मू
पूर्वी सिंहभूम के रहने वाले शिव प्रसाद मुर्मू कहते हैं मैं बीएसएफ में जॉब करता था। उसके बाद फॉरेस्ट विभाग में आया। अब यहां सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर काम कर रहा था। अचानक से सरकार ने ऐसा फैसला लिया, जिसके बाद हम सभी बीच मझदार में फंस गए हैं। शिव प्रसाद ने कहा- मेरे ऊपर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। बच्चों को भी रांची लेकर आ गया था। अब कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या करें, क्या ना करें। मेरा कुछ अच्छा हो, तभी मैं इस जॉब में आया था। अब सरकार हमसे यह भी छीन लेना चाहती है। बताइए अब हम कहां जाएंगे? मेरा सपना ही टूट गया: लीटा बास्के
पूर्वी सिंहभूम के रहने वाले लीटा बास्के ने कहा-ये मेरी पहली जॉब है। 2015 में सीजीएल की परीक्षा दी थी, जो रद्द हो गई थी। इसके बाद लगातार हम लोग प्रयास करते रहे और अंततः 2025 में जॉइनिंग हुआ। मैंने सोचा था कि अब शादी करूंगा और घर बसाउंगा। पर मेरा सपना ही टूट गया। उन्होंने कहा- हम लोग कभी भी सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटते हैं। झारखंड सरकार ने कहा था कि 2023 में कि हमने यह कानून भी बनाया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी और और एक करोड़ का जुर्माना भी लिया जाएगा तो सरकार पीछे क्यों भाग रही है। मेरा भविष्य खराब कर दिया इस सरकार ने: कृष्ण कुमार
कृष्ण कुमार पलामू के रहने वाले हैं। वो कहते हैं कि सरकार ने मुझे एक बार फिर बेरोजगार कर दिया। मैंने अपने छोटे भाई से सहयोग लेकर पढ़ाई की और इस परीक्षा को पास किया। भाई गाड़ी चलाता है। अब सरकार ने मुझे ऐसी जगह पर लाकर खड़ा कर दिया है कि मैं अपने भाई के लिए तो छोड़िए अपने लिए भी कुछ नहीं कर सकता हूं। उन्होंने कहा- मैं शादीशुदा हूं और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छे स्कूल में डाला था। अब उसकी फीस कहां से भरूंगा। मेरे बच्चे और मेरा, दोनों का भविष्य बर्बाद कर दिया इस सरकार ने। एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेना कहां तक सही है: चंदा कुमारी विरोध कर रहीं चंदा कुमारी कहती हैं-हमारी न्यायपालिका और लोकतंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि भले ही 100 दोषी लोग छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन सरकार के इस फैसले से हाजरों निर्दोष लोगों को तुरंत सजा मिल गई है। क्या परीक्षा रद्द करना सिस्टम को बेहतर बनाने का सही तरीका है? क्या इससे असल दोषियों को सजा मिल पाएगी? पिछले 24 दिनों से सरकार ने सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी है और दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया है। एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेना कहां तक सही है? हमें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। इसलिए अब हम मीडिया के जरिए अपनी बात रख रहे हैं।
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