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सरकारी स्कूल से बेंगलुरु MBA तक, कटहल प्रोसेसिंग से बदली सरिता की...


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Success Story: झारखंड में रांची की रहने वाली सरिता देवी घर पर ही प्रोसेसिंग यूनिट लगवाई हैं. हालांकि सरिता को सरकार की तरफ से काफी सब्सिडी और मदद मिली है. उन्होंने बताया कि इस प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए वह कटहल की पैकेजिंग करती हैं. ऐसा पैकेजिंग होता है कि कैन में 2 साल तक खराब नहीं होता है. मतलब आप 2 साल तक इस कटहल का प्रयोग कर सकते हैं. आइये जानते हैं सरिता की सफलता के बारे में.

सरिता ने बताया कि इसके अलावा वह कटहल का अचार से लेकर कटहल का चिप्स और पापड़ बनाती हैं. आज मुंबई, दिल्ली और अमेजॉन में इनका प्रोडक्ट हिट है. इस साल का टर्नओवर 23 लाख तो गया ही. इसके अलावा वह अपने साथ 8 महिलाओं को भी जोड़े हुए हैं, जो साथ में उनके काम करती हैं और उनकी भी रोजी रोटी चलती है.

सरिता बताती हैं कि उनके यहां कटहल बहुत होता है. अगर आप रांची के किसी भी ग्रामीण एरिया में चल जाएं तो आप देखेंगे कि कटहल के पेड़ बहुत हैं और कई बार खराब भी हो जाते हैं. बाजार में पूरा माल बिक नहीं पाता है.

ऐसे में इसे स्टोर करने का उन्हें आइडिया आया और सरकार की तरफ से फूड प्रोसेसिंग स्कीम के तहत उन्हें सब्सिडी भी दी गई और और साथ में ट्रेनिंग भी. इसके बाद वह और मेरे साथ और 8 अन्य महिलाओं ने मिलकर इन सभी को कैन में पैक करने का काम शुरू किया.

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वह तरह-तरह की चिप्स बनाती हैं. जहां कटहल के कई सारे अचार जैसे मीठा, खट्टा, मिक्स इस तरीके का अचार बनाने का काम करती हैं. यहां से लोग विदेश तक उनका अचार लेकर जाते हैं. पहले से घर के हालात भी उनकी बहुत सुधर गई है.

सरिता बताती हैं कि एक समय था. जब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना होता था. प्राइवेट स्कूल तो एक सपना था, लेकिन आज आलम यह है कि वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से पढाकर आज बेंगलुरु से एमबीए की पढ़ाई करा रही हैं. अब तो उनका प्लेसमेंट भी होने वाला है. अब जिंदगी पहले से काफी बदल चुकी है और उनके साथ 8 महिलाएं भी सशक्त हो रही हैं.

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