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नोएडा में 290 करोड़ से 300 मीटर का बना सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक,...


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नोएडा में 290 करोड़ रुपये की लागत से बना 300 मीटर का सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक एथलीटों के लिए बेकार साबित हुआ है, क्योंकि पेशेवर ट्रैक 400 मीटर का होता है. सचिन एक एथलीट है जिनका इवेंट 5हजार मीटर और 10हजार मीटर है. लोकल 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि नोएडा में कोई सिंथेटिक ट्रैक न होने चलते हमें दिल्ली के अक्षरधाम या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जाना पड़ता है. लंबे अरसे की कोशिशों के बाद स्टेडियम में एक ट्रैक बनवाया गया है, जो किसी काम का नहीं है.

नोएडा: नोएडा के युवा उसैन बोल्ट और पीटी ऊषा जैसा बनने के लिए मंच तलाशते थे और इसकी लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्राधिकरण से मांग थी कि एक सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक बनवाकर सुविधा मुहैया करवाई जाए. जिसका संज्ञान लेते हुए स्प्रिंट रेसिंग ट्रैक बनकर लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन अब ये खास प्रोजेक्ट यहां के ऐथलीट और उनके कोच के बीच चर्चाओं का विषय बन गया है. इनका कहना है कि ये सिंथेटिक ट्रैक नहीं दुनिया का आठवां अजूबा है. क्योंकि ये मानको के तौर पर नहीं बनाया गया. इसमें कोई प्रतियोगिता आयोजित नहीं करवाई जा सकती और सबसे बड़ी वजह है कि ये 300 मीटर ट्रैक है जोकि दुनिया में आपको कहीं नहीं मिलेगा.

300 मीटर का एथलेटिक ट्रैक बना है

सचिन एक एथलीट है जिनका इवेंट 5हजार मीटर और 10हजार मीटर है. लोकल 18 से बात करते हुए उन्होंने कहा कि नोएडा में कोई सिंथेटिक ट्रैक न होने चलते हमें दिल्ली के अक्षरधाम या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जाना पड़ता है. लंबे अरसे की कोशिशों के बाद स्टेडियम में एक ट्रैक बनवाया गया है, जो किसी काम का नहीं है. उसकी सबसे बड़ी वजह है कि प्रोफेशनल ट्रैक 400 मीटर का होता है पूरे विश्व में आपको 300 मीटर का ट्रैक नहीं मिलेगा, लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने इसे बनवाया है. इसके पीछे की क्या मंशा और दबाव रहा होगा ये नहीं पता लेकिन पल्ला झाड़ने वाली कहावत सिद्ध हुई है ऐसा इस ट्रैक से नजर आ रहा है.

वही अशोक सैनी जोकि डिस्ट्रिक्ट एथलेटिक्स एसोसिएशन के ज्वाइंट सिक्रेटरी है. उनका कहना है इस ट्रैक को बनवाने और यहां के एथलीट्स को सुविधा देने के लिए हमने शासन प्रशासन को कई बार चिट्ठी लिखी. सालों इंतजार के बाद इन्होंने इस ट्रैक को बनवाया. बनवाने से पहले भी हमने हमारी एसोसिएशन और डिस्ट्रिक्ट ओलंपिक एसोशिएशन ने इन्हें ट्रैक के बारे में टेक्निकल बारीकियां और जरूरी चीजों के बारे में बताया, उस समय इन्होंने हमें ये कहकर टाल दिया कि एक मीटिंग होगी उसके बाद ही इसका मैप और डिजाइन पास किया जाएगा. लेकिन पता नहीं कौन से प्रोफेशनल से इन्होंने ये ट्रैक का मैप और डिजाइन पास करवाकर बनवा दिया समझ नहीं आया जो अब शायद किसी काम का नहीं है.

290 करोड़ का आया खर्चा

अशोक सैनी बताते है कि डिस्ट्रिक्ट लेवल पर 200मीटर का एथलीट के लिए चल जाता है और लेकिन आप स्टेट, नेशनल, इंटरनेशनल, एशियाई और ओलंपिक में 400 मीटर ही चलता है. पूरे विश्व में आपको 300 मीटर का ट्रैक कहीं नहीं मिलेगा. अगर 400 मीटर नहीं है वहां किसी तरह की प्रतियोगिता कराना मतलब लोहे के चने चबाना जैसा है. या संभव ही नहीं है. साथ ही इन्होंने बताया कि एथलेटिक्स का मतलब होता है ट्रैक एंड फील्ड ट्रैक इन्होंने बनाकर पूरा कर दिया लेकिन फील्ड इवेंट्स में इन्होंने कुछ नही बनाया है और अब ग्रास लगाने की तैयारी है जो बाद में बनाना मुश्किल होगा. वही नोएडा प्राधिकरण की माने तो इस प्रोजेक्ट में करीब 290 करोड़ की लागत आई है.

फील्ड इवेंट में जम्प और थ्रो इवेंट्स होते है, जंप इवेंट्स में लॉन्ग जंप, ट्रिपल जंप, हाई जंप, पोल वॉल् वही थ्रो इवेंट्स में डिस्कस थ्रो, शॉट पुट, जैवलिन थ्रो, हैमर थ्रो होते हैं. इन आठ में से एक भी इवेंट के लिए इन्होंने किसी मंच को तैयार नहीं किया है. वही ट्रैक पर की गई मार्किंग में भारी कमी और एथलीट के लिए कंफ्यूजन पैदा करने वाली है. पहली लाइन को पूरी तरह जोड़ा नहीं गया है और जहां फिनिशिंग लाइन होती वहां डॉट डॉट मार्किंग होती है वो कुछ नहीं है, मार्किंग टेक्निकल तरीके से नहीं हुई है जो किसी एथलीट के लिए बड़ी दुविधा वाली और डिस्क्वालीफाई के चांस बढ़ेंगे.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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