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Banking System : भारतीय बैंकिंग सिस्टम में जून महीने में कैश की कमी हो गई तो आरबीआई ने अपनी तरफ से कई लाख करोड़ रुपये इसमें डाले. हालांकि, बैंकों ने भी सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट यानी सीडी के जरिये 1.80 लाख करोड़ रुपये जुटाए. यह मई के मुकाबले 70 फीसदी तो पिछले साल के जून के मुकाबले 38 फीसदी ज्यादा थे.
बैंकों ने सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के जरिये पौने 2 लाख करोड़ जुटाए हैं.
नई दिल्ली. बैंकिंग सिस्टम में कैश की कमी कोई नई बात नहीं है. देश में लगातार बढ़ रही कर्ज की मांग को देखते हुए कैश लिक्विडिटी पर दबाव रहता है. इस दबाव को कम करने के लिए आरबीआई अपनी तरफ से कर्ज देने की भी पेशकश करता है. बीते जून महीने में जब कैश का संकट बढ़ा तो आरबीआई ने एक बार फिर बैंकों को पैसा ऑफर किया, लेकिन इस बार बैंकों ने कैश लेने के बजाय खुद के दम पर नकदी जुटाने का रास्ता चुना. यह रास्ता कारगर भी रहा और बैंकों ने जून महीने में सिर्फ जमा प्रमाणपत्र यानी सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के जरिये ही 1.80 लाख करोड़ की नकदी जुटा ली.
क्लीयरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) ने अपने हालिया आंकड़ों में बताया है कि बैंकों के जमा प्रमाणपत्र (सीडी) के जरिये धन जुटाने में जून में सालाना आधार पर 38 फीसदी की वृद्धि हुई. इसकी वजह बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी और कर्ज बांटने में तेजी रही है. बैंकों द्वारा अपनी जरूरत पूरा करने के लिए जमा प्रमाणपत्र एक प्रमुख अल्पकालिक साधन है. मई की तुलना में जून में जमा प्रमाणपत्र (सीडी) जारी करने में 61.79 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. सीसीआईएल के अनुसार, बैंकों ने जून में सीडी के जरिये 1.80 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जबकि मई में यह राशि 1.12 लाख करोड़ रुपये और जून, 2025 में 1.31 लाख करोड़ रुपये थी.
क्यों जारी करनी पड़ी सीडी
सीएसबी बैंक के समूह प्रमुख (ट्रेजरी) आलोक सिंह ने बताया कि सीडी जारी करने में वृद्धि के पीछे नकदी की कमी, कर्ज वितरण में अच्छी बढ़ोतरी, कर भुगतान के कारण नकदी का बाहर जाना और जमा वृद्धि का अपेक्षाकृत धीमा रहना जैसे कई कारण रहे हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हाल ही में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी बैंकों के लिए भविष्य में वित्तपोषण को प्रमुख जोखिम बताया गया था. सीडी जारी करने में वृद्धि मुख्य रूप से 5 बड़े सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की वजह से हुई है.
इन बैंकों ने उठाया सबसे ज्यादा पैसा
जून में सीडी के जरिये एचडीएफसी बैंक ने सबसे अधिक 26,285 करोड़ रुपये जुटाए. इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (24,125 करोड़ रुपये), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (21,175 करोड़ रुपये), केनरा बैंक (17,000 करोड़ रुपये) और एक्सिस बैंक (16,360 करोड़ रुपये) का स्थान रहा. इन पांच बैंकों ने मिलकर 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो जून में सीडी से जुटाई कुल राशि का 58.25 फीसदी है. लिक्विडटी कवरेज अनुपात (एलसीआर) पर दबाव और जमा वृद्धि धीमी रहने के कारण सभी बैंकों को सीडी के जरिये जमा जुटाना पड़ा है.
जून में आया था कैश डेफिसिटी
जून में भारतीय बैंकिंग सिस्टम में नकदी पर दबाव बना रहा, विशेषकर एडवांस्ड टैक्स और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के भुगतान के कारण नकदी निकलने के बाद. एक जून से 21 जून के बीच कैश सरप्लस था, लेकिन उसके बाद यह घाटे में चला गया. इससे आरबीआई को हस्तक्षेप करते हुए परिवर्ती दर रेपो (वीआरआर) नीलामी के जरिये अस्थायी नकदी उपलब्ध करानी पड़ी. केंद्रीय बैंक ने एक दिन से लेकर सात दिन की अवधि वाली 13 वीआरआर नीलामियों के जरिये बैंकिंग सिस्टम में 5,97,900 करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी डाली. इसके बावजूद बैंकों को सीडी के जरिये भी कैश जुटाना पड़ा.
क्या होता है सीडी
सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट यानी सीडी एक तरह का निवेश विकल्प होता है, जो कम समय के लिए बैंकों की ओर से जारी किया जाता है. इसकी मेच्योरिटी अवधि 7 दिन से लेकर 1 साल तक हो सकती है. बैंक इस पर एफडी की तरफ ब्याज ऑफर करते हैं, लेकिन इसमें से मेच्योरिटी के बाद ही रकम निकाली जा सकती है. सीडी में आम आदमी के साथ-साथ संस्थागत निवेशक और कॉरपोरेट भी अपने पैसे लगा सकते हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें