फरीदाबाद: एक समय हरियाणा की शान मानी जाने वाली फरीदाबाद की बड़खल झील आज फिर से अपनी पहचान हासिल करने की कोशिश में जुटी है. वर्षों तक सूखी रहने के बाद झील को दोबारा विकसित करने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की पुनर्जीवन परियोजना पर काम चल रहा है. निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद हर शाम बड़ी संख्या में लोग दिल्ली-एनसीआर समेत दूसरे राज्यों से यहां घूमने पहुंच रहे हैं. लोगों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद बड़खल झील एक बार फिर देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होगी.
बड़खल झील क्यों है चर्चा में
झील को सालभर पानी से भरा रखने के लिए शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित पानी पाइपलाइन के जरिए लाया जा रहा है. इसके साथ ही रिटेनिंग वॉल, वॉकिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, पार्किंग, लाइटिंग, हरित क्षेत्र और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. भविष्य में यहां बोटिंग, ओपन कैफेटेरिया और व्यूइंग डेक शुरू करने की भी योजना है. हालांकि, झील में तेजी से फैल रही जलकुंभी अब सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है जिससे पानी की गुणवत्ता और झील की सुंदरता दोनों प्रभावित हो रही हैं.
व्यू अच्छा है लेकिन साफ-सफाई बिल्कुल नहीं
मृत्युंजय कुमार बताते हैं मैं लुधियाना, पंजाब से बड़खल झील घूमने आया हूं. यहां का व्यू अच्छा है लेकिन साफ-सफाई बिल्कुल ठीक नहीं है. जगह-जगह गंदगी फैली हुई है. यहां टिकट रखा जाए ताकि उसी पैसे से रखरखाव हो सके. सिक्योरिटी और सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए. अभी झील में जलकुंभी बहुत ज्यादा है अगर इसकी सफाई हो जाए और बोटिंग शुरू हो जाए तो यह जगह और भी शानदार बन जाएगी.
मृत्युंजय कुमार की पत्नी सुनीता बताती हैं मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूं, लेकिन शादी के बाद लुधियाना में रहती हूं. बड़खल झील पहली बार घूमने आई हूं. यहां का नजारा बहुत सुंदर है लेकिन गंदगी देखकर अच्छा नहीं लगा. अगर यहां रोज साफ-सफाई हो तो यह जगह परिवार के साथ घूमने के लिए बेहतरीन बन सकती है.
हरदयाल सिंह बताते हैं मेरी उम्र 74 साल है और मैं रोज शाम को यहां घूमने आता हूं. पहले इस इलाके का पूरा स्वरूप अलग था. पहाड़ों से पानी सीधे झील में आता था. बाद में विभाग ने यहां बांध बनाया, होटल और रेस्टोरेंट भी बने. अब सरकार दोबारा झील को विकसित कर रही है, लेकिन अभी काफी काम बाकी है. इसे पूरा होने में 6 महीने या एक साल भी लग सकता है. जलकुंभी इतनी ज्यादा फैल चुकी है कि इसे हटाने में भी काफी समय लगेगा.
यहां काफी विकास हुआ है
रोहित बताते हैं मैं शर्मा चौक से यहां आता हूं. करीब डेढ़ साल से लगातार बड़खल झील देख रहा हूं. इस दौरान यहां काफी विकास हुआ है. अभी भी काम चल रहा है और आगे यह जगह पहले से कहीं ज्यादा बेहतर बनेगी. उम्मीद है कि काम पूरा होने के बाद लोग बड़ी संख्या में यहां घूमने आएंगे.
इस मामले में डीसी आयुष सिंह बताते हैं कि नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और झील की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन के मुताबिक वन विभाग की मंजूरियों में देरी, कोविड-19 महामारी, तकनीकी बदलाव और निर्माण संबंधी चुनौतियों के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी. अब सभी की नजर इस बात पर है कि करोड़ों रुपये की यह परियोजना बड़खल झील को सिर्फ नया स्वरूप देगी या फिर इसे दोबारा उसी प्राकृतिक पहचान और पर्यटन की रौनक तक पहुंचा पाएगी जिसके लिए यह कभी पूरे हरियाणा में मशहूर थी.