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आगरा के 7 प्राचीन शिव मंदिर… कहीं दिन में 3 बार रंग...


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Agra Ke Prachin Shiv Mandir: मोहब्बत की नगरी के नाम से मशहूर आगरा का एक और अलौकिक रूप भी है, जिसे ‘शिव नगरी’ या ‘शिवालय नगरी’ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. मान्यता है कि आगरा के चारों कोनों और शहर के केंद्र में साक्षात महादेव विराजमान हैं, जिनकी असीम कृपा के कारण इस शहर पर कभी कोई बड़ी आपदा नहीं आ सकती. सतयुग से लेकर द्वापर युग और पृथ्वीराज चौहान के काल से जुड़े इन 7 प्राचीन मंदिरों का इतिहास बेहद चमत्कारी और अद्भुत है, जहां आज भी भक्तों को साक्षात महादेव की मौजूदगी का अहसास होता है. आइए जानते हैं आगरा के इन रहस्यमयी और भव्य शिव मंदिरों की महिमा.

उत्तर प्रदेश के आगरा को शिव नगरी कहा जाए तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी. दरअसल, आगरा के चारों कोनों में प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं, वहीं शहर के मध्य में भी एक भव्य प्राचीन शिव मंदिर है. कहा जाता है कि चारों ओर शिव होने के कारण कभी कोई आपदा आगरा में नहीं आ सकती है. आगरा का कैलाश मंदिर सिकंदरा क्षेत्र में स्थित है. यह मंदिर सदियों पुराना है जहां एक साथ दो शिवलिंग स्थापित हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं. यहां शिवलिंग की स्थापना खुद भगवान परशुराम और उनके पिता ने की थी. वर्तमान में यह मंदिर आस्था का केंद्र है.

आगरा के बल्केश्वर महादेव मंदिर का इतिहास भी बेहद प्राचीन बताया जाता है. यह भव्य और आकर्षक मंदिर यमुना किनारे स्थित है. इतिहासकार बताते हैं कि आगरा में यमुना नदी के तट पर स्थित बल्केश्वर महादेव मंदिर तकरीबन 600 से 700 साल पुराना है. उन्होंने कहा कि भक्तों की मान्यता है कि पहले यहां कभी बेलपत्र (बिल्व) का घना जंगल हुआ करता था. एक दिन जंगल की कटाई के दौरान यहां एक चमत्कारी शिवलिंग प्रकट हुआ था, जिसके बाद इस स्थान पर इस प्राचीन मंदिर की स्थापना की गई. तब से लेकर आज तक यहां लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं. आस-पास और दूर-दराज के भक्त यहां सोमवार को विशेष पूजा करते हैं.

आगरा के शमसाबाद रोड पर स्थित प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बेहद प्राचीन और भव्य है. इतिहासकार बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास करीब 800 से 900 साल पुराना है. दरअसल, इस प्राचीन मंदिर के शिवलिंग की विशेषता यह है कि यह दिन में तीन बार रंग बदलती है, जो अपने आप में अद्भुत और चमत्कार है. यह शिवलिंग सुबह यानी कि मंगला आरती पर सफेद, दोपहर में हल्की नीली और शाम की आरती के दौरान गुलाबी प्रतीत होती है. सफेद रंग की यह शिवलिंग बेहद चमत्कारी और अद्भुत है. सावन के महीने में यहां बड़े मेले का आयोजन होता है, जिसे देखने दूर-दराज से लोग यहां आते हैं.

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आगरा जिसे शिव नगरी कहा जाता है, यहां भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनके बारे में हम आपको बता रहे हैं. वहीं आगरा के शाहगंज क्षेत्र में एक बेहद प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर कहा जाता है. इतिहासकार बताते हैं कि यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है. मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने की थी और इसी कारण इस शिवलिंग का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर रखा गया था. यह आगरा का एकमात्र महादेव मंदिर है जहां भगवान शिव की भस्म महाआरती की जाती है.

आगरा शहर के बीचों-बीच स्थित प्राचीन शिव मंदिर यानी कि मनकामेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास द्वापर युग का बताया जाता है. यह मंदिर आगरा के सबसे घनी आबादी के बीच बना हुआ है. मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था, तब उनके दर्शन की इच्छा से भगवान शिव यहां आए थे और उन्होंने स्वयं इस शिवलिंग की स्थापना की थी. यहां भगवान शिव की मनोकामना पूर्ण हुई थी, इसलिए इस मंदिर का नाम मनकामेश्वर रखा गया है. कहा जाता है कि सच्चे मन से मन्नत मांगने पर यहां भगवान शिव सबकी मनोकामना पूर्ण करते हैं.

आगरा के सिकंदरा स्थित कैलाश गांव में प्राचीन भूरा महादेव मंदिर है. हालांकि, यह जंगल और यमुना किनारे होने के कारण बेहद कम ही लोग यहां तक पहुंच पाते हैं. लेकिन आस्था और भगवान शिव के प्रति भक्तों का प्रेम उन्हें यहां तक खींच लाता है. मान्यता है कि यदि कोई यहां 16 सोमवार लगातार पूजा करता है, तो भगवान शिव उसकी हर एक मनोकामना पूर्ण करते हैं. यह भव्य प्राचीन शिवलिंग कैलाश मंदिर से पहले श्याम कुटीर के पीछे यमुना किनारे स्थापित है.

आगरा में कई प्राचीन और भव्य मंदिर हैं, उन्हीं में से एक है आगरा के मोटा महादेव मंदिर का इतिहास. मान्यता है कि यह मंदिर सतयुग का है. यहां के पुजारी और इतिहासकार बताते हैं कि सतयुग में इस स्वयंभू विशाल शिवलिंग की स्थापना भगवान कार्तिकेय द्वारा की गई थी. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से शिवलिंग को बाहों में भरकर मन्नत मांगने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह स्थान घने जंगलों और यमुना नदी के तट के बीच स्थित है. लोक मान्यताओं के अनुसार, यहां के विशाल शिवलिंग को दोनों हाथों से पूरी तरह से घेर पाना असंभव माना जाता है.

आगरा में कई प्राचीन शिव मंदिरों की वजह से इसे शिव नगरी या शिवालय नगरी भी कहा जाता है. आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने बताया कि आगरा की चारों दिशाओं में भगवान शिव का होना अपने आप में चमत्कार और अद्भुत है. उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त शहर के मध्य में भी भगवान शिव विराजमान हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगरा की धरती कई युगों पुरानी है और यहां आस्था का सैलाब भी सावन में देखने को मिलता है.

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