राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार मसूद इलियास का नाम कई बड़े आतंकी मामलों की जांच में सामने आया है. सबसे प्रमुख मामला 2018 के सुंजवां आर्मी कैंप हमले का है. इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने जम्मू स्थित सैन्य स्टेशन को निशाना बनाया था. जांच के दौरान NIA ने जिन पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और साजिशकर्ताओं के नाम सामने रखे, उनमें मसूद इलियास का भी उल्लेख किया गया. भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि उसने हमले की योजना बनाने, आतंकियों को लॉजिस्टिक सहायता देने और सीमा पार से पूरे ऑपरेशन का समन्वय करने में भूमिका निभाई.
हालांकि 2016 के उरी हमले और 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले में मसूद इलियास को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है, लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह जैश-ए-मोहम्मद के उस कमांड नेटवर्क का हिस्सा रहा, जिसने इन हमलों के लिए आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण और घुसपैठ जैसी गतिविधियों को संचालित किया. इन हमलों की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी और एजेंसियों के अनुसार संगठन के वरिष्ठ कमांडरों में होने के कारण मसूद इलियास का नेटवर्क इन अभियानों से जुड़ा रहा.
2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी मसूद इलियास चर्चा में आया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसने एक वीडियो जारी किया, जिसमें बहावलपुर में भारतीय कार्रवाई के दौरान मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों के मारे जाने का दावा किया गया. इस वीडियो में उसने पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान ने जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क के आंतरिक हालात की भी झलक दी. किसी वरिष्ठ कमांडर का सार्वजनिक रूप से सामने आना यह भी दिखाता है कि संगठन अपने समर्थकों के बीच मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहा था. हालांकि इस संबंध में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
गृह मंत्रालय के अनुसार मसूद इलियास केवल हमलों की योजना बनाने तक सीमित नहीं था. उसकी भूमिका आतंकवादियों की भर्ती से लेकर हथियारों की आपूर्ति तक फैली हुई थी. जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश करता था. इसके बाद उन्हें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के प्रशिक्षण शिविरों तक पहुंचाया जाता था.
इन कैंपों में आतंकियों को हथियार चलाने, विस्फोटक तैयार करने, IED लगाने, घुसपैठ करने और सुरक्षा बलों पर हमले करने की ट्रेनिंग दी जाती थी. इसके अलावा ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद भारतीय सीमा तक पहुंचाने वाले नेटवर्क से भी उसका नाम जोड़ा गया है. पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में बरामद कई हथियारों और विस्फोटकों की जांच में ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ था.
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित करने का फैसला तभी लिया जाता है, जब उसके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के पर्याप्त प्रमाण हों. गृह मंत्रालय का कहना है कि मसूद इलियास के खिलाफ कई वर्षों से विभिन्न एजेंसियां जानकारी जुटा रही थीं. जांच में सामने आया कि वह केवल जैश का सदस्य नहीं बल्कि संगठन के ऑपरेशनल ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
सरकार का आरोप है कि वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं के लिए आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और हथियारों की आपूर्ति जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है. इसके अलावा वह सीमा पार मौजूद लॉन्चिंग पैड से आतंकियों को भारतीय सीमा में भेजने की रणनीति भी तैयार करता था. इसी वजह से उसे आतंक के पूरे इकोसिस्टम का अहम संचालक माना गया.
भारतीय एजेंसियों के अनुसार मसूद इलियास ने समय के साथ अपनी रणनीति बदली. उसने केवल पारंपरिक आतंकी नेटवर्क पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया. जांच में सामने आया कि इंटरनेट के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने, उन्हें संगठन से जोड़ने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिशें की जाती थीं.
इसके अलावा एजेंसियों का दावा है कि वह ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक भेजने वाले नेटवर्क से भी जुड़ा रहा. पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनके पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की भूमिका की जांच हुई है. मसूद इलियास का नाम भी ऐसे नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है.
UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद मसूद इलियास की भारत में मौजूद किसी भी संपत्ति को जब्त करने, उसके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का रास्ता मजबूत होता है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत उसके खिलाफ उपलब्ध सबूतों को अधिक मजबूती से पेश कर सकता है.
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं है. इसका उद्देश्य उन पूरे नेटवर्क पर दबाव बनाना है, जो पाकिस्तान और PoK से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों को संचालित करते हैं. सरकार का संदेश साफ है कि आतंकवाद की योजना बनाने वाले, उसे वित्तीय मदद देने वाले और उसे अंजाम तक पहुंचाने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को ‘व्यक्तिगत आतंकवादी’ घोषित करने का क्या मतलब होता है?
UAPA के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित करने का अर्थ है कि भारत सरकार के पास उसके आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के पर्याप्त आधार हैं. इसके बाद उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई, वित्तीय लेनदेन की निगरानी, उससे जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग आसान हो जाता है. यह फैसला किसी संगठन के साथ-साथ उसके प्रमुख संचालकों को भी सीधे कानून के दायरे में लाने का माध्यम है.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भारत के लिए सुरक्षा चुनौती क्यों बना रहता है?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार PoK में कई आतंकी संगठनों के लॉन्चिंग पैड और प्रशिक्षण शिविर मौजूद रहे हैं. सीमा के निकट होने के कारण घुसपैठ की कोशिशें यहीं से होती हैं. यही वजह है कि भारत लंबे समय से इन शिविरों को आतंकवाद का आधार मानता रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाता रहा है.
आतंकियों को व्यक्तिगत रूप से सूचीबद्ध करने से क्या फर्क पड़ता है?
पहले अक्सर केवल आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाता था. लेकिन अब उनके प्रमुख कमांडरों और संचालकों को भी व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी घोषित किया जा रहा है. इससे उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट होती है, वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलती है और भविष्य में प्रत्यर्पण या अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूत आधार तैयार होता है.